साइबर फ्रॉड:बैंक खाते फ्रीज, व्यापारियों ने यूपीआई से भुगतान लेना बंद किया, पुलिस समझाने पहुंची

साइबर फ्रॉड की आशंका के चलते बैंक द्वारा खाते फ्रीज़ करने के विरोध में पिछले दिनों इंदौर के व्यापारी मुखर हो गए। इसके विरोध में उन्होंने अपनी दुकानों पर यूपीआई से भुगतान लेना बंद कर दिया। व्यापारियों का कहना था कि साइबर फ्रॉड की आशंका में अलग-अलग सरकारी बैंकों ने उनके करंट अकाउंट फ्रीज़ कर दिए। इसमें उनके खातों में भुगतान आ तो रहा था लेकिन वो उसमे से राशि निकाल नहीं पा रहे थे। इस वजह से उनका लेनदेन प्रभावित हो रहा था और उनके चेक बाउंस होने लगे। बैंक वालों से बात की तो वे कहने लगे कि इसे अन ब्लॉक करने की प्रक्रिया बहुत लंबी है। और ये ब्लॉक करने की कार्रवाई हेड ऑफिस से हुई है और स्थानीय ब्रांच का इसमें कोई हाथ नहीं। इस सब से हताश व्यापारियों ने विरोध करने के लिए बैंक खातों में भुगतान लेने से ही इनकार कर दिया। रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि 25 व्यापारियों के खाते बैंक ने फ्रीज किए। इसीलिए हमने बैंक में पैसे लेने से इनकार कर दिया। यदि बैंक को खाते में फ्रॉड का पैसा आने की आशंका थी, तो केवल उतनी राशि फ्रीज की जाती। लेकिन बैंक ने पूरा खाता ही फ्रीज़ कर दिया। इसकी वजह से जहां-जहां व्यापारियों ने पोस्ट डेटेड चेक दिए थे वो सब बाउंस हो गए। इस परेशानी को उठाने में बाज़ार के 600 से ज्यादा व्यापारियों ने सहयोग दिया। पुलिस ने कहा नोडल सेंटर बनाएंगे सोमवार को एडिशनल डीसीपी राजेश डंडोतिया ने व्यापारियों की परेशानियों को समझा और उनकी सहायता करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही इंदौर में एक साइबर फ्रॉड नोडल सेंटर भी बनाएंगे जो इंदौर के लोगों की परेशानियों को समझने और दूसरे राज्यों के बीच समन्वय करने का काम करेगा। उन्होंने खातों को अन-फ्रीज़ करने के लिए जरूरी दस्तावेज़ व्यापारियों से लिए। इसके लिए व्यापारियों ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न, दुकान के रजिस्ट्रेशन, बैंक स्टेटमेंट सहित कई दस्तावेज़ बैंक को दिए। इसके बाद अधिकतर बैंकों ने जांच कर के 48 घंटों में खाते खोलने का आश्वासन दिया।

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