सादुलपुर में लम्बोर टोल प्लाजा विवाद:तीसरे दौर की वार्ता विफल, संघर्ष समिति ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

सादुलपुर के लम्बोर बड़ी स्थित एसएच-41 पर संचालित टोल प्लाजा को अवैध बताते हुए संघर्ष समिति और आसपास के ग्राम वासियों ने उपखंड अधिकारी राजगढ़ को ज्ञापन सौंपा गया। टोल प्लाजा की वैधता और अन्य मुद्दों को लेकर प्रशासन के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा रही। स्थानीय वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग ज्ञापन में समिति ने पांच प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें टोल प्लाजा की वैधता, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, सड़क सुरक्षा मापदंडों का पालन और स्थानीय वाहनों को टोल मुक्त करने की मांग शामिल है। समिति ने यह भी मांग की है कि यदि पूर्व अधिग्रहण से अधिक भूमि उपयोग में ली गई है, तो प्रभावित किसानों को वर्तमान दर से मुआवजा दिया जाए। जानकारी साझा करने की मांग समिति ने बताया कि वर्ष 1965 में यहां 25 फीट का आम रास्ता था। वर्ष 1981 से 1986 के बीच किसानों की विभिन्न खातेदारी कृषि भूमियों से अधिकतम 15 फीट भूमि का अधिग्रहण मुआवजे सहित किया गया था। समिति ने वर्तमान में राजगढ़ से झुंझुनूं तक जाने वाली स्टेट हाईवे एसएच-41 की मौजूदा चौड़ाई, लम्बोर व बैरासर की रोही में अलग-अलग चौड़ाई तथा टोल प्लाजा की दूरी की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। तीसरे दौर की वार्ता रही बेनतीजा उपखंड अधिकारी मनोज खेमदा की मध्यस्थता में प्रशासन के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता देर शाम तक बेनतीजा रही। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें टोल प्लाजा से संबंधित आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक धरना जारी रहेगा और आंदोलन तेज किया जाएगा। समिति ने टोल को तब तक टोल-मुक्त रखने की बात भी कही है। इस दौरान संघर्ष समिति के अजीत पूनिया, मुनेश पुनिया, कुराडा राम, एडवोकेट गायत्री पूनिया और एडवोकेट चरण सिंह गुलपुरा उपस्थित रहे।

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