सामने आया जल-जीवन मिशन घोटाले के ‘विजय शंकर’ का राज:छिपाने की कोशिश कर रहे थे कंपनी मालिक, इंजीनियर-दलाल, जानिए ACB कैसे पहुंची सच तक

राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में एक हफ्ते पहले 10 गिरफ्तारियों और पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल के फरार होने से मामला फिर सुर्खियों में है। जल जीवन मिशन के तहत ठेके लेने वाली कंपनियों के मालिक, दलाल और पीएचईडी (जलदाय विभाग) के इंजीनियरों पर मिलीभगत कर 960 करोड़ के घोटाले को अंजाम देने के आरोप हैं। ठेके लेने वाली दो कम्पनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल कम्पनी के केरल में चले वाटर प्रोजेक्ट को पूरा करने के फर्जी सर्टिफिकेट लगाए थे। इसी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर इन कम्पनियों को यहां ठेके दिए गए। ACB ने 2023 में जब मामला दर्ज किया तो एक नाम ने काफी परेशान किया था… ‘विजय शंकर।’ इरकॉन कम्पनी के सर्टिफिकेट पर ‘विजय शंकर’ के साइन थे। ACB इस व्यक्ति तक पहुंचना चाहती थी। वहीं ठेका लेने वाली कम्पनी के मालिक, दलाल और इंजीनियर नहीं चाहते थे कि ACB के सामने कभी ‘विजय शंकर’ का राज खुले। जांच में साजिशों की पूरी परत खुलती चली गई और ‘विजय शंकर’ का राज सामने आ गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जल जीवन मिशन में घोटाले की शिकायतें 2023 की शुरुआत से पिछली सरकार, ACB और विभाग के सामने आने लगी थीं। इसके बावजूद मई, 2023 में पीएचईडी (जलदाय विभाग) की वित्तीय समिति ने टेंडर पास कर दिए। कंपनी को करोड़ों के काम करने की स्वीकृति दे दी। इस बीच शिकायतों के आधार पर ACB ने जाल बिछाना शुरू कर दिया। ठेके लेने वाले श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी के मालिक महेश मित्तल, श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी के मालिक पदमचन्द जैन, दलाल मुकेश पाठक सहित अन्य संदिग्ध इंजीनियरों की एक-एक एक्टिविटी पर नजर रखी और फोन सर्विलांस पर लिए। महेश, पदमचंद और दलाल मुकेश को उनके खिलाफ फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर ठेके लेने की शिकायतों की जानकारी थी। ACB की सर्विलांस में महेश, पदमचंद और मुकेश की ओर से इंजीनियरों के साथ लेन-देन जाहिर हो चुका था। तीनों की बातचीत में पकड़े जाने की आशंका और बचाव के रास्तों पर भी चर्चाएं शामिल थीं। बातचीत में बार-बार इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के सर्टिफिकेट का भी जिक्र हो रहा था और एक व्यक्ति का नाम लिया जा रहा था…’विजय शंकर’। कंपनी मालिकों ने टेंडर हासिल करने के लिए इरकॉन की ओर से दिए गए सर्टिफिकेट लगाए थे। सर्टिफिकेट बता रहा था कि इरकॉन के केरल में वाटर प्रोजेक्ट को श्री गणपति ट्यूबवेल कम्पनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कम्पनी द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। ‘विजय शंकर के बारे में पता चल गया तो दिक्कत हो जाएगी’
इरकॉन के सर्टिफिकेट जारी करने वाले का नाम ‘विजय शंकर’ था। इनपर उसके साइन भी थे। महेश और दलाल मुकेश ने आपसी बातचीत में कई बार कहा कि ‘ACB को विजय शंकर के बारे में पता नहीं लगना चाहिए। यदि ACB को विजय शंकर के बारे में पता चल गया, तो दिक्कत हो जाएगी।’ महेश ने दलाल मुकेश पाठक से ये भी कहा- तुम इरकॉन कम्पनी के ऑफिस जाकर वहां अधिकारियों को मैनेज करो। पैसे देने पड़ें तो दे देना। बस फर्जी सर्टिफिकेट की बात दब जाए। एक बातचीत में मुकेश ठेके लेने वाली कंपनी के मालिक महेश से कहता है- फर्जी प्रमाण पत्रों के मैटर को दबाने के लिए मैं लगातार इरकॉन ऑफिस के अधिकारियों से मिल रहा हूं, लेकिन अभी काम नहीं बन पाया है। कई रिकॉर्डिंग में भी बार-बार विजय शंकर नाम के व्यक्ति का जिक्र हो रहा था। अब ACB की नजरों में विजय शंकर पर जा टिकीं, जिसके बारे में जांच एजेंसी को कोई जानकारी नहीं थी। इस बीच ACB ने अगस्त, 2023 में जल जीवन मिशन में ठेका घोटाले के आरोप में गिरफ्तारियां शुरू कर दीं। पदमचंद जैन भी गिरफ्तार हुआ। इसके बाद ACB ने एक और एफआईआर अक्टूबर 2024 में पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत 22 लोगों के खिलाफ दर्ज की। अप्रैल 2025 को एसीबी ने महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया था। ACB ने सर्टिफिकेट जांच के दायरे में रखा। अगला निशाना इरकॉन कम्पनी की ओर से इस सर्टिफिकेट को जारी करने वाला विजय शंकर था। इंजीनियर का केरल में जांच का नाटक, बाहर नहीं आने दी ‘विजय शंकर’ की पहचान
ACB ने 17 फरवरी को दलाल मुकेश पाठक सहित 10 अफसरों को गिरफ्तार किया। इन गिरफ्तारियों में एक नाम तत्कालीन अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना का भी है। विशाल सक्सेना की जांच रिपोर्ट के कारण ‘विजय शंकर’ की पहचान शुरू में सामने आ ही नहीं पाई और ACB को भी गुमराह करने की कोशिश की गई। पिछली सरकार के दौरान विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने लगातार मुद्दा उठाया। विभाग के आला अधिकारियों पर दबाव बढ़ता जा रहा था। जलदाय विभाग के आला अधिकारियों ने दिखावे के लिए मामले की जांच शुरू की। जांच अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना को सौंपी गई। विशाल सक्सेना को केरल जाकर इरकॉन कम्पनी के वाटर प्रोजेक्ट से जुड़े कामों को देखना था, जिन्हें श्रीगणपति ट्यूबवेल और श्रीश्याम ट्यूबवेल कम्पनियों की ओर से पूरा किया गया था। इसके लिए इरकॉन ने इन कम्पनियों को सर्टिफिकेट भी दिए थे। ACB सूत्रों के अनुसार, विभाग के घोटाले में संदिग्ध आला अधिकारियों ने जांच के लिए अपने ‘पसंद’ के अफसर को भेजा। यदि किसी और इंजीनियर को भेज देते तो सर्टिफिकेट के फर्जी होने की रिपोर्ट सामने आ जाती, जिससे ये मिलीभगत और लेन-देन का खेल पहले ही उजागर हो जाता। विशाल सक्सेना 4 अप्रैल 2023 को केरल पहुंचा। 5 दिन जांच में लगाए और 9 अप्रैल को लौट आया। उसने अपनी रिपोर्ट 13 अप्रैल, 2023 को जलदाय विभाग को सौंप दी। विशाल ने इरकॉन के केरल में पूरे किए वाटर प्रोजेक्ट्स को लेकर पॉजिटिव रिपोर्ट सौंपी। ‘विजय शंकर’ के दस्तखत वाले सर्टिफिकेट को सही (वेरिफाई) बताया। ACB सूत्रों के अनुसार, विशाल सक्सेना भी संदिग्ध इंजीनियरों में शामिल था। उसे विभाग के आला अधिकारियों ने जानबूझकर मामले को दबाने के लिए भेजा था। इंजीनियर विशाल ने यह जांच तक नहीं की कि सर्टिफिकेट में जिस ‘विजय शंकर’ के साइन हैं, वो कौन है और इरकॉन कम्पनी में किस पोस्ट पर है। राज छिपाने के लिए कैसे-कैसे खेल, लेकिन सामने आ गया सच
पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि उन्हें जानकारी थी कि इंजीनियर विशाल सक्सेना ने अपनी जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी कर विजय शंकर के दस्तखत वाले सर्टिफिकेट सही बताए हैं और ठेके लेने के लिए ये फर्जी सर्टिफिकेट लगाए गए। फिर भी अग्रवाल ने ठेके लेने की प्रक्रिया को होने दिया और करोड़ों के वर्ग ऑर्डर भी जारी होने दिए। ACB सूत्रों के अनुसार, ‘विजय शंकर’ को नामजद किया गया था। उसकी तलाश जारी थी। जलदाय विभाग के दफ्तरों-अधिकारियों को इरकॉन कम्पनी और विजय शंकर की मेल आईडी से मेल किए गए थे। जांच में पता चला कि ठेके लेने के लिए लगाए गए सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन (सत्यापन) जलदाय विभाग के सभी संबंधित दफ्तरों में इरकॉन कम्पनी की ओर से मेल के जरिए किया गया था। सवाल ये था कि ये मेल किसने किए थे? एसीबी ने जांच के दौरान इरकॉन कंपनी को लेटर भेज कर सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन करने और सर्टिफिकेट पर दस्तखत करने वाले ‘विजय शंकर’ के बारे में पूछा। हाल ही में इरकॉन कम्पनी ने ACB को लेटर भेज कर सर्टिफिकेट के फर्जी होने की बात को पुख्ता कर दिया है। इरकॉन ने कहा है कि उनके यहां ‘विजय शंकर’ नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। इरकॉन की ओर से जलदाय विभाग के दफ्तर में मेल ही नहीं किए गए हैं और कोई सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया गया है। ACB ने इरकॉन के सर्टिफिकेट को लेकर पद्मचंद और महेश से सख्ती से पूछताछ की। पता चला कि दलाल मुकेश ने ‘विजय शंकर’ के नाम से फर्जी मेल आईडी बनाई हुई है। दलाल मुकेश ने खुद फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर जलदाय विभाग के दफ्तर में सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन किया था। वह इरकॉन कम्पनी की ओर से खुद जलदाय विभाग की मेलों का जवाब दे रहा था। जांच में सामने आया कि पद्मचंद जैन, महेश मित्तल और दलाल मुकेश के बीच ठेका लेने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने की साजिश रची गई थी। मुकेश पाठक (दलाल) ने 15 लाख रुपए में इन दोनों कम्पनियों के लिए इरकॉन इंटरनेशनल कम्पनी के फर्जी सर्टिफिकेट की व्यवस्था की थी। मुकेश के मोबाइल की जांच में ये बात साबित भी हो गई। ट्रैप की कार्रवाई ने खोला 960 करोड़ का घोटाला
ACB ने 6 अगस्त, 2023 को अलवर और नीमराना के पीएचईडी अफसरों को जयपुर में 2.20 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस ट्रैप की कार्रवाई की जांच में 960 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन के घोटाले का खुलासा हुआ। मायालाल सैनी बहरोड़ व जेईएन प्रदीप नीमराना में कार्यरत थे। दोनों इंजीनियरों को होटल पोलो विक्ट्री के पास से पकड़ा गया। बिल पास करने के एवज में रिश्वत ली जा रही थी। ACB ने रिश्वत देने वाले ठेकेदार पदमचंद जैन और उसकी कंपनी के सुपरवाइजर मलकेत सिंह और एक अन्य व्यक्ति को भी पकड़ा। तत्कालीन एडीजी ACB प्रियदर्शी ने कहा था कि इनके मोबाइल को सर्विलांस पर रखा हुआ था। यह रिश्वत की राशि पीएचईडी विभाग बहरोड़ में करवाए गए निर्माण कार्यों के बकाया बिलों को पास करने की एवज में मांगी गई थी। मायालाल सैनी और प्रदीप रिश्वत ले रहे थे। फर्म का ठेकेदार पदमचंद जैन और एक अन्य आदमी रिश्वत दे रहे थे। पदमचंद जैन की फर्म का नाम श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी है। उसके एक रिश्तेदार की कंपनी का नाम श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी है। ———– जल जीवन मिशन घोटाले की यह खबर भी पढ़िए… राजस्थान- PHED का चीफ इंजीनियर ताज होटल से गिरफ्तार, रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के ठिकाने पर भी ACB की छापेमारी, 9 अफसरों को पकड़ा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर के फाइव स्टार होटल ताज अरावली से आज (मंगलवार) सुबह गिरफ्तार किया गया। करीब 900 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले मामले में यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने की। पढ़ें पूरी खबर…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *