लोहरदगा|आदिवासी समन्वय समिति लोहरदगा के अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद उरांव के नेतृत्व में जिले के विभिन्न आदिवासी संगठनों के अगुआओं ने सोमवार को डीसी लोहरदगा को झारखंड सामाजिक-सांस्कृतिक वाद्य यंत्र क्रय निविदा को रद्द करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के दौरान अरविंद उरांव ने आरोप लगाया कि समेकित जनजाति विकास अभिकरण (आइटीडीए), लोहरदगा द्वारा जीईएम पोर्टल के माध्यम से पत्रांक-1892, दिनांक 23/12/2025 को नगाड़ा, मांदर, घंटा, करताल, बांसुरी जैसे पारंपरिक आदिवासी वाद्य यंत्रों की खरीद के लिए निविदा जारी की गई थी। इस निविदा में लोहरदगा के अलावा अन्य जिलों के निविदाकारों ने भी भाग लिया। उन्होंने बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि स्थानीय निविदाकारों को तकनीकी और अन्य बहानों से बाहर कर दिया गया, जबकि विभागीय मिलीभगत से बाहरी निविदाकारों को लाभ पहुंचाया गया। आरोप यह भी है कि जिस कंपनी को निविदा दी गई, वह मैन्युफैक्चरिंग कंपनी नहीं बल्कि केवल मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनी है, जो नियमों के विरुद्ध है। अरविंद उरांव ने इसे एक बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा कि आदिवासी कल्याण मंत्री के आप्त सचिव की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जो सीधे तौर पर बाहरी निविदाकारों को फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन वाद्य यंत्रों का बाजार मूल्य लगभग 10 हजार रुपए है, उन्हें ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग 25 हजार रुपये में खरीदा जा रहा है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने डीसी से मांग की कि इस कथित वाद्य यंत्र घोटाले पर अविलंब रोक लगाई जाए और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आदिवासी संगठन जोरदार आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल में अरविंद उरांव, मुकेश कुमार, गोविंद उरांव, जगदीप भगत, वीरेंद्र उरांव, संदीप कुमार, अनिल रविदास, मंगलेश्वर उरांव, सुधराम उरांव सहित कई लोग शामिल थे।


