तहसीलदारों को अभी मंत्री के बयान से आपत्ति, भ्रष्टाचार में कार्रवाई पर भी यही रवैया प्रदेश भर के तहसीलदार सोमवार से सामूहिक अवकाश पर हैं। राजस्व अमले के सामूहिक अवकाश का यह पहला मामला नहीं है। पिछले 4 महीने में 3 बार सामूहिक अवकाशों के चलते हर बार करीब 7-7 दिन जनता के जरूरी काम बंद रहे। इस बार मंत्री के बयान पर आपत्ति है तो दिसंबर में पटवारी भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के विरोध में सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। असर ये हुआ कि भोपाल राजस्व महाभियान में 32 से 42वें पायदान पर लुढ़क गया। जानकारों का कहना है कि इस तरह बार-बार हड़ताल करने पर सरकार कर्मचारी, अधिकारियों पर कार्रवाई कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षक, लिपिकीय वर्ग आदि पर ऐसे मामलों में कार्रवाई हुई भी। नियमों की बात करें तो सामूहिक अवकाश का कोई प्रावधान ही नहीं है। सरकार सख्ती करे तो अवकाश अवधि का वेतन काटने से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। इस मामले में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस पर बात करने से इनकार कर दिया। बार-बार अवकाश से आम जनता के काम अटक रहे, राजस्व अभियान में पिछड़े हम अवकाश का असर 1. सितंबर में हड़ताल के बाद भोपाल 32वें पायदान पर था।
2. दिसंबर में 42वें से ज्यादा नंबर पर फिसल गया था।
3. जनवरी में हड़ताल के पहले भोपाल राजस्व महाअभियान 3.0 में 34वें नंबर पर आ गया था एक साल में 5 से ज्यादा अवकाश-हड़ताल
एक साल में पटवारी और तहसीलदार 5 से ज्यादा बार हड़ताल और अवकाश पर जा चुके हैं। एक साल पहले भोपाल के अटल पथ पर इन्होंने बड़ा प्रदर्शन किया था। कोटवार से लेकर तहसीलदार तक इसमें शामिल हुए थे। यह है अधिनियम और कार्रवाई के प्रावधान एस्मा लागू कर सकते हैं
निलंबन, वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है, अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे सकती है।
सरकार अति आवश्यक सेवा अधिनियम (एस्मा) घोषित कर काम पर वापस लौटने की अपील कर सकती है। {सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रावधान के तहत कार्रवाई संभव। कब क्या कार्रवाई हुई


