जयपुर में 14 गोल के सिरमौर कप पोलो टूर्नामेंट के दौरान रविवार को एक घोड़े की मौत हो गई। घोड़ा कैरेसिल सुहाना टीम के कुलदीप सिंह राठौड़ का था। दिल का दौरा पड़ने से यह मौत हुई। इससे पहले इसी सीजन कोग्निवेरा पोलो कप के फाइनल के दौरान भी एक घोड़े की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। एक ही सीजन में दो घोड़ों की मौत हो चुकी हैं। कोग्निवेरा पोलो कप फाइनल के दौरान जिस घोड़े की मौत हुई, वह पद्मनाभ सिंह का था। डॉक्टर पहुंचे तब तक तोड़ दिया दम
कुलदीप सिंह राठौड़ चौथा चक्कर पूरा करके ग्राउंड के बाहर आए, तभी घोड़ा लड़खड़ाकर गिर गया। डॉ. सुदामा गुप्ता दूसरे छोर पर जयपुर अरावली टीम के साथ थे। जब तक डॉक्टर वहां तक पहुंचे, घोड़े की सांसें बंद हो चुकी थीं। एसडीएमएच की एम्बुलेंस भी वहां थी। हमने उसके डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा, घोड़ों की देखभाल का काम वेटरनरी डॉक्टर करते हैं। 13 साल पहले एक ही दिन दो घोड़ों की मौत हुई थी
13 साल पहले यानी 2013 में भी राजस्थान पोलो ग्राउंड पर ही एक ही दिन दो घोड़ों की मौत हो गई थी। ये दोनों घोड़े भी दिल का दौरा पड़ने से मरे थे। 17 जनवरी, 2013 को भवानी सिंह पोलो कप के दौरान एक ही दिन ये हादसे हुए थे। रेसिंग व पोलो में एक फीसदी से भी कम होते हैं ऐसे हादसे
“रेसिंग और पोलो में इस तरह के हादसे होते हैं, लेकिन इनकी संख्या एक प्रतिशत से भी कम होती है। आमतौर पर दिल का दौरा पड़ने से मौत होने पर पोस्टमार्टम नहीं होता है। चोट वगैरह से मौत होती है तो पोस्टमार्टम कराते हैं। दोनों घोड़ों की मौत दिल का दौरा पड़ने से ही हुई।”
-डॉ. सुदामा गुप्ता, वेटरनरी डॉक्टर यह दुखद है, पर इस तरह के हादसे कभी-कभी हो जाते हैं
“एक ही सीजन में दिल का दौरा पड़ने से दो घोड़ों की मौत होना दुखद है। टूर्नामेंट में उतरने से पहले सभी घोड़ों की गहन चिकित्सा जांच कराई जाती है, फिर भी इस तरह के हादसे कभी-कभी हो जाते हैं।”
-दिग्विजय सिंह, सचिव, राजस्थान पोलो संघ एक्सपर्ट— कर्नल डॉ. अशोक सिंह राठौड़, 61 कैवलरी के पूर्व खिलाड़ी व अपोलो कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन में प्रोफेसर मेडिसिन


