सिरोही का हर्बल गुलाल उत्तराखंड-दिल्ली तक पहुंचा:बंपर बिक्री से आदिवासी महिलाओं को मिला आर्थिक संबल

सिरोही जिले में तैयार किया जा रहा हर्बल गुलाल अब उत्तराखंड और दिल्ली तक पहुंच गया है। पिंडवाड़ा के बसंतगढ़ और आबूरोड के निचलागढ़ एवं चंदेला वन धन विकास केंद्रों पर आदिवासी महिलाओं द्वारा निर्मित इस प्राकृतिक गुलाल को बाहरी राज्यों से अच्छी मांग मिली है।
राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के मार्गदर्शन में यह गुलाल तैयार किया जा रहा है। वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पलाश, गुलाब, चुकंदर, हल्दी और अन्य प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर रसायन मुक्त गुलाल बना रही हैं। यह गुलाल त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल है। इसकी गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इसे स्थानीय बाजारों के साथ-साथ उत्तराखंड और दिल्ली से भी ऑर्डर मिले हैं। महिलाओं ने खुशी जताई
बढ़ती मांग को देखते हुए इस वर्ष गुलाल के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। महिलाओं ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि राजीविका उनके लिए वरदान साबित हुई है और उनके उत्पाद का दूसरे राज्यों तक पहुँचना गर्व की बात है। आबूराज में आयोजित एक कार्यक्रम में एसडीएम डॉ. अंशु प्रिया ने हर्बल गुलाल स्टॉल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
राजीविका महिलाओं को उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। इससे महिलाएं संगठित होकर कार्य कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। सिरोही का यह हर्बल गुलाल ‘लोकल टू नेशनल’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक सशक्तिकरण ला रहा है।

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