सिरोही जिले के पिंडवाड़ा ब्लॉक में राजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक फूलों से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी ये महिलाएं रसायन मुक्त और पर्यावरण अनुकूल गुलाल का निर्माण कर रही हैं।
बसंतगढ़ गांव में, महिलाएं पलाश, चुकंदर, गुलाब, गेंदा (हंजारी फूल), हरी पत्तियां और रीजगा जैसे रंग-बिरंगे प्राकृतिक फूलों का उपयोग करती हैं। इन फूलों को सुखाकर और फिर उनकी प्रोसेसिंग करके गुलाल बनाया जाता है। यह पहल स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही है। इसके साथ ही, वनोपज और कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। यह प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों के उपयोग को भी बढ़ावा देता है।
राजीविका मिशन के तहत इन महिलाओं को प्रशिक्षण, पैकेजिंग और विपणन में सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। पिंडवाड़ा के ब्लॉक परियोजना प्रबंधक मनोज मीणा ने बताया, “बसंतगढ़ में तैयार किया जा रहा हर्बल गुलाल देशभर में अपनी गुणवत्ता और प्राकृतिक रंगों के कारण लोकप्रिय हो रहा है। विभिन्न राज्यों से इसकी मांग प्राप्त हो रही है, जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।”
राजीविका सिरोही की जिला परियोजना प्रबंधक अंबिका राणावत ने कहा, “राजीविका के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर तैयार किया जा रहा हर्बल गुलाल न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि महिलाओं की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम भी बन रहा है। यह पहल महिला सशक्तिकरण और हरित आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”


