सिवनी शहर के प्रमुख मार्गों पर सड़क और फुटपाथ पर ठेला-पटरी व अस्थायी दुकानों के अतिक्रमण से आमजन की परेशानी बढ़ गई है। ज्यारत से थोक सब्जी मंडी, नेहरू रोड, छिंदवाड़ा रोड और शुक्रवारी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में फुटपाथ पर कब्जा होने के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है। राहगीरों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। शहर में लगभग 48 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों के आसपास भी यही स्थिति है। सुबह-शाम बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को यातायात के बीच सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय नागरिकों हेमंत पंचेश्वर, राकेश नागफासे, समय साहू और शाहिद खान ने बताया कि नगर पालिका की ओर से अतिक्रमण हटाने के अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन ये कार्रवाई स्थायी नहीं हो पाती। कुछ ही दिनों में फुटपाथ और सड़कें फिर से ठेलों से भर जाती हैं। दुकानदार बोले- पैसे के लिए ठेला लगाने को मजबूर दूसरी ओर, फुटपाथी दुकानदारों का भी अपना पक्ष है। दुकानदार संजू साहू, प्रहलाद डेहरिया और गन्नू मेहरा का कहना है कि वे रोजगार के लिए मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि नगर पालिका उन्हें सुरक्षित और वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए, तो वे स्वयं फुटपाथ खाली करने को तैयार हैं। बार-बार हटाने की कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाता है। फुटपाथ के कारण वाहनों को निकलने में परेशानी इस अतिक्रमण के कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। संकरी सड़कों, अव्यवस्थित पार्किंग और फुटपाथ पर दुकानों की वजह से दोपहिया और चारपहिया वाहनों को निकलने में परेशानी होती है, जिससे अक्सर जाम लग जाता है। स्थानीय वाहन चालकों के अनुसार, छोटे-मोटे हादसे अब आम बात हो गए हैं। प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की मांग सामाजिक संगठनों और नागरिकों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल अतिक्रमण हटाने से संभव नहीं है। इसके लिए नगर पालिका को ठोस योजना बनाकर नियोजित वेंडिंग जोन या वैकल्पिक बाजार विकसित करने होंगे। साथ ही, ठेला-पटरी नीति को सख्ती से लागू कर फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाना आवश्यक है। शहरवासियों ने प्रशासन से यातायात सुगमता और जनसुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है।


