सीता की कथा के जरिए बेटियों की पीड़ा दिखाई:आरआईसी में मैथिली नाटक ‘जनक नंदिनी’ का मंचन, दर्शकों को दिया सामाजिक संदेश

राजस्थान पर्यटन विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग, रंग मस्ताने और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ के तीसरे दिन शनिवार को नाटक ‘जनक नंदिनी’ का मंचन किया गया। शाम 7:30 बजे राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के मंच पर दिल्ली की मैलोरंग रेपर्टरी ने मैथिली भाषा में यह प्रस्तुति दी। इस नाटक का लेखन और निर्देशन प्रकाश झा ने किया। प्रस्तुति की खास बात यह रही कि मंच पर सभी पात्रों की भूमिका महिलाओं ने निभाई। नाटक में सीता अपनी सखियों के बीच लौटती हैं और वे उनसे जीवन से जुड़े कई तीखे और सामाजिक सवाल करती हैं। इन सवालों के बीच सीता अपने जीवन की उन परतों को सामने रखती हैं जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक दबाकर रखा था।
सीता के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को मंच पर दिखाया नाटक में सीता के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर दिखाया गया। इसमें सीता स्वयंवर, राम विवाह, मिथिला से विदाई, राम का वनवास, सती अनुसुइया की सीख, सोने के हिरण की कथा, सीता हरण, अशोक वाटिका, अग्नि परीक्षा और उनके त्याग से जुड़े प्रसंग शामिल रहे। कलाकारों ने मैथिली भाषा में संवाद प्रस्तुत किए और मैथिली संगीत के साथ नाटक को जीवंत बना दिया। सीता के बहाने आज की बेटियों की स्थिति पर उठे सवाल प्रस्तुति में सीता की कथा के माध्यम से आज के समय की बेटियों की स्थिति को भी सामने रखा गया। नाटक में यह सवाल उठाया गया कि जब किसी स्त्री पर संकट आता है तो कई बार समाज और परिवार मौन हो जाते हैं। इस मौन को नाटक के जरिए दर्शकों के सामने रखा गया, जिसने हॉल में मौजूद लोगों को सोचने पर मजबूर किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा और राजीविका मिशन की डायरेक्टर नेहा गिरी सहित कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक और कला प्रेमी शामिल हुए।

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