डूंगरपुर जिले के चौरासी विधानसभा क्षेत्र में स्थित सीमलवाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। यह क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। 50 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 9 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में 6 पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए मजबूरन गुजरात का रुख करना पड़ रहा है। फिलहाल, सीमलवाड़ा सीएचसी में केवल तीन डॉक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें स्त्री एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ और सीएचसी प्रभारी डॉ. सुभाष रोत, मेडिकल ऑफिसर डॉ. अरविंद परमार और जनरल सर्जन डॉ. जिग्नेश कटारा शामिल हैं। अन्य सभी महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। विशेषज्ञों के अभाव में ‘रेफरल सेंटर’ बना अस्पताल अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर मशीनें तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले हाथ नहीं हैं। अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन धूल फांक रही हैं, क्योंकि सोनोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। गर्भवती महिलाओं को निजी सेंटरों पर मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। क्षेत्र में आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के घायलों को यहां विशेषज्ञ नहीं मिलने पर प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत रेफर कर दिया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ और दंत चिकित्सक के पद खाली होने से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों और दंत रोगियों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों की कमी के चलते बड़ी संख्या में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, जहां से कई मरीज मजबूरी में गुजरात के निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं। इससे गरीब और जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के मरीजों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ रहा है। अर्बन श्रेणी बनी रुकावट क्षेत्रवासियों का कहना है कि सीमलवाड़ा CHC को ‘अर्बन’ (शहरी) श्रेणी में रखा गया है। इस कारण यहां सेवाएं देने वाले जूनियर डॉक्टरों को पीजी प्रवेश में मिलने वाले 10:20:30 बोनस अंकों का लाभ नहीं मिलता। इसी तकनीकी वजह से युवा डॉक्टर यहां पोस्टिंग लेने से कतराते हैं। ग्रामीणों ने इसे ‘रूरल’ (ग्रामीण) श्रेणी में शामिल करने की मांग की है ताकि डॉक्टरों का रुझान बढ़े। क्षेत्रवासियों ने सीमलवाड़ा सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे अस्पताल में सुविधाएं बढ़ेंगी, डॉक्टरों के पद बढ़ेंगे, 24 घंटे सेवाएं मिलेंगी और गुजरात पलायन पर रोक लगेगी। सीमलवाड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए गुजरात पलायन करना पड़ रहा है। अस्पताल में स्वीकृत 9 पदों में से 6 पद खाली हैं, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्रवासियों ने सीमलवाड़ा सीएचसी को उप जिला चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने और इसे ‘रूरल’ श्रेणी में शामिल करने की मांग की है ताकि डॉक्टरों का रुझान बढ़े और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


