बांदरसिंदरी स्थित राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में गुरुवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का विषय “इकोसिस्टम रेस्टोरेशन: बदलते क्लाइमेट में मेडिसिनल प्लांट्स की भूमिका (NCERMPCC-2026)” है। ये आयोजन नेशनल मेडिकल प्लांट बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में नेशनल मेडिकल प्लांट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. महेश कुमार दाधीच मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की पूर्व उप कुलपति प्रो. नीता कोटेचा विशिष्ट अतिथि थीं। प्रो. दाधीच ने अपने संबोधन में औषधीय पौधों के संरक्षण और सही उपयोग को पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एनएमपीबी देशभर में औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है। प्रो. दाधीच ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिक से अधिक पेड़ लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से पीपल जैसे पेड़ों के महत्व को रेखांकित किया और सभी से अपने जीवन में कम से कम सात पेड़ लगाने तथा उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी सुधार के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल दिया। विभागाध्यक्ष एवं आयोजन सचिव डॉ. प्रमोद एन. कांबले ने स्वागत भाषण में बदलती जलवायु और घटती जैव विविधता से निपटने के लिए शोध और नीति समन्वय की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संग्रह पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह दो दिवसीय सम्मेलन देशभर से वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्यमी और शोधार्थियों को एक मंच प्रदान कर रहा है। इसमें व्याख्यान, तकनीकी सत्र, मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। उद्घाटन सत्र का समापन प्रो. राजेश कुमार द्वारा आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।


