अलवर शहर के दिल्ली दरवाजा के पास हलवाई पाड़ा मोहल्ले और गंगा मंदिर क्षेत्र में सोमवार रात करीब 1 बजे टाइगर आने की सूचना से इलाके में दहशत फैल गई। कुछ लोगों ने कथित टाइगर की तस्वीरें और सीसीटीवी स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया ग्रुपों में पोस्ट कर दिए। मंगलवार सुबह तक टाइगर के मूवमेंट की चर्चा जारी रही। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल की, लेकिन टाइगर आने की कोई पुष्टि नहीं हो सकी।सोशल मीडिया पर तस्वीरें आने के बाद वन विभाग भी अलर्ट हो गया। जब भास्कर टीम ने मामले की पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। रिपोर्टर हलवाई पाड़ा की उस जगह पहुंचे जहां टाइगर देखे जाने की बात कही गई थी। स्थानीय निवासी रतनलाल सेठी ने बताया कि रात करीब 1 बजे कुत्तों के भौंकने की आवाज आई। कुछ लोगों ने एक शावक जैसा जानवर देखने का दावा किया, लेकिन किसी पशु को नुकसान नहीं पहुंचा। बाद में एक युवक के मोबाइल में टाइगर की फोटो देखकर लोगों को यकीन हो गया। इसके बाद टीम गंगा मंदिर क्षेत्र में उस घर पहुंची जहां के सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर ग्रुपों में पोस्ट की गई थी। मकान मालिक ने खुलासा किया कि वायरल फोटो असली नहीं थी, बल्कि AI से बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि रात में मोहल्ले के ग्रुप में दोस्तों के बीच मजाक चल रहा था। पहले एक युवक ने अपनी गली की फोटो लेकर उसमें AI से टाइगर जोड़कर शेयर की और लिखा कि “बच्चों, रात में बाहर मत निकलना, टाइगर घूम रहा है।” इसी मजाक में उन्होंने भी सीसीटीवी स्क्रीनशॉट पर AI से टाइगर की छाया जोड़कर फोटो पोस्ट कर दी। बाद में ये तस्वीरें अलग-अलग ग्रुपों में वायरल हो गईं और लोगों में भय का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। भास्कर की जांच में साफ हुआ कि अलवर शहर में टाइगर के मूवमेंट की खबर पूरी तरह झूठी और सोशल मीडिया पर फैलाया गया मजाक था, जिसने बेवजह दहशत फैला दी।


