सीहोर जिले में एक नवजात बच्ची के सड़क पर अंतिम संस्कार किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना सीहोर-भेरुदा मार्ग पर मंगलवार को हुई, जिसका वीडियो शुक्रवार को सामने आया है। बच्ची के पिता ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क पर ही अपनी बच्ची का अंतिम संस्कार किया। जानकारी के अनुसार, प्रसूता ममता पत्नी संतोष जाट को 30 दिसंबर को शाम 4:30 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने 2 जनवरी 2026 को रात 2:22 बजे सामान्य प्रसव से एक प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया। बच्ची का वजन मात्र 900 ग्राम था, जो कि अत्यधिक कम था। स्टाफ को नोटिस जारी किया गया
नवजात को तत्काल जिला चिकित्सालय के एस.एन.सी.यू. में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई थी। सोमवार को दोपहर 3:30 बजे बच्ची की मृत्यु हो गई। इसके बाद चिकित्सकों ने परिजनों को शव लेने के लिए बुलाया, लेकिन बच्ची के पिता ने डॉक्टरों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रसव के समय चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे और एस.एन.सी.यू. के चिकित्सक व स्टाफ का व्यवहार उचित नहीं था। इन आरोपों के संबंध में संबंधित चिकित्सक और स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। रिपोर्टर ने मौके पर जाकर पुष्टि की
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, परिजनों ने प्रदर्शन से पहले सिविल सर्जन, आर.एम.ओ. या किसी अन्य वरिष्ठ चिकित्सक को सूचित नहीं किया था। महिला चिकित्सक ने अपने बयान में बताया है कि उन्होंने महिला की जांच की थी और प्रसव प्रशिक्षित नर्सिंग ऑफिसर द्वारा लेबर रूम में कराया गया था। सोशल मीडिया पर सड़क पर अंतिम संस्कार का वीडियो वायरल होने के बाद जब संतोष से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें जिला अस्पताल के सामने धरने से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सीहोर-भेरूदा-इछावर मार्ग पर, जहां ‘कृषि’ लिखा था, अपनी बच्ची का अंतिम संस्कार सड़क पर ही कर दिया। संवाददाता ने उस मार्ग पर जाकर अंतिम संस्कार स्थल की पुष्टि की। यह भी पढ़ें… नवजात की मौत, दंपती का हंगामा:बोले- चेहरा तक नहीं दिखाया सीहोर जिले में सोमवार शाम जिला अस्पताल के सामने एक दंपती अपने बच्चों के साथ सड़क पर बैठ गए और अस्पताल की लापरवाही का रोष जताया। उनका आरोप था कि अस्पताल की व्यवस्थाओं के कारण उनकी नवजात शिशु बालिका की मौत हो गई और उन्हें बच्ची का शव देने से भी इनकार कर दिया गया। यह घटना लगभग 50 मिनट तक अस्पताल के गेट पर हंगामे का कारण बनी और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिया। पूरी खबर पढ़िए…


