पंजाब अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंजाब पुलिस की एफआईआर और इंक्वायरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिक्रम मजीठिया ने आज दोबारा से 6 वीडियो मीडिया के सामने रखी। जिनमें उन्होंने आरोप लगाए हैं कि नारायण सिंह चौड़ा अकेला नहीं था। उनके साथ देखने वाला एक अन्य व्यक्ति बाबा धर्मा था, जो खुद आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है, वहीं एक अन्य भी इस मामले में साथ है। मजीठिया ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले मांग की है कि चीफ सुखबीर बादल पर हुए हमले की जांच डीजीपी रैंक के अधिकारी को दी जाए। बिक्रम मजीठिया ने डीजीपी पंजाब गौरव यादव को 13 पन्नों का पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने एसपी हरपाल सिंह रंधावा के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार करने की भी गुहार लगाई है। वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर की इंक्वायरी को खारिज कर दिया है। आज चंडीगढ़ में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिक्रम मजीठिया ने सवाल खड़े किए कि पुलिस की तरफ से की गई एफआईआर आतंकी चौड़ा को बचाने के लिए की गई। बिक्रम मजीठिया की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए महत्वपूर्ण पॉइंट – 1. एफआईआर को कमजोर किया गया- बिक्रम मजीठिया ने पंजाब पुलिस पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने एफआईआर को कमजोर करने के लिए गोली कत्ल करने की नीयत से नहीं, बल्कि गुत्थम-गुत्थी होते समय चलने की बात कही गई है। यानी कि ये सीधे-सीधे इरादतन कत्ल नहीं दिख रहा। 2. आतंकी चौड़े के साथ दिखने वाले व्यक्ति की पहचान- बिक्रम मजीठिया ने वीडियो जारी कर बताया कि आंतकी चौड़े के साथ दिखने वाला कोई और नहीं बल्कि आतंकी दौर में उसी का साथ देने वाला बाबा धर्मा है। बाबा धर्मा तरनतारन के वैरोवाल का रहने वाला है। उसके खिलाफ भी कई वैपन व डेडली हथियारों के मामले दर्ज हैं। 3. वीडियो में दिखा एक और संदिग्ध- बिक्रम मजीठिया ने वीडियो जारी कर आतंकी चौड़ा और बाबा धर्मा के साथ चलने वाले एक और व्यक्ति को आइडेंटिफाई किया है। मजीठिया का आरोप है कि इस व्यक्ति की अभी पहचान नहीं हुई है। लेकिन ये भी इनके साथ ही था। इतना ही नहीं, आतंकी चौड़ा तीन दिसंबर को उसी की बाइक पर जाता दिखा था। 4. एसपी रंधावा पर फिर उठाया सवाल- बिक्रम मजीठिया ने एक बार फिर आतंकी चौड़ा की वीडियो दिखाते हुए बताया कि जिस समय एसपी हरपाल सिंह रंधावा आतंकी चौड़ा से मिल रहा था, उसी समय उसका साथी बाबा धर्मा भी पास था। कोर क्रिमिनल व्यक्तियों के बार-बार सुखबीर बादल के पास आने के वीडियो सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस कैसे कह सकती है कि वे सतर्क थी। 5. एफआईआर में नहीं दिखा सुरक्षाकर्मी का नाम- बिक्रम मजीठिया ने सवाल खड़ा किया कि सभी ने लाइव वीडियो में सुखबीर बादल के सुरक्षाकर्मी जसबीर सिंह को चौड़ा को पकड़ते देखा। इसके बावजूद पुलिस ने घटना से तीन घंटे बाद हुई एफआईआर में ना तो जसबीर सिंह का नाम लिखा गया और ना ही उसके बयान रखे गए हैं। डीजीपी को लिखे खत में भी एफआईआर पर उठाया सवाल वहीं सुखबीर बादल पर हुए हमले को लेकर एक एफआईआर भी सामने आई है। सुखबीर बादल पर हमला सुबह करीब 9.30 बजे हुआ। लेकिन पुलिस ने शिकायत करीब 3.30 बजे दर्ज की। इतना ही नहीं एफआईआर में इस बात का भी जिक्र नहीं है कि सुखबीर बादल के आसपास कौन था और किसने सुखबीर को गोली लगने से बचाया। एफआईआर में लिखा है- मैं कानून व्यवस्था ड्यूटी के सिलसिले में प्लाजा घंटा घर अमृतसर में मौजूद था, तभी मुझे पता चला कि सुखबीर सिंह बादल घंटा घर की दर्शनी के बाहर हैं। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री वल्लो, जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब अमृतसर द्वारा लगाई गई धार्मिक सजा को पूरा करने के लिए घंटा घर गेट के बाहर मौजूद थे। नाम पूछने पर नारायण सिंह बताया दरबार साहिब के दर्शन करने जा रहे लोगों में से एक ने अचानक अपने बैग से पिस्तौल निकाली और उन पर हमला करना शुरू कर दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे काबू में किया और गुथम गुत्थी के दौरान पिस्तौल से हवाई फायर कर दिया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसे एक तरफ ले जाकर उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम नारायण सिंह बताया। ऐसा करके उक्त व्यक्ति ने 109बीएनएस, 25/27 आर्म्स एक्ट का अपराध किया है। घटना अमृतसर पुलिस की विफलता से हुई घटना के बाद से ही बिक्रम मजीठिया लगातार पुलिस की इन्क्वायरी पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि सुखबीर बादल पर हमला पंजाब पुलिस की विफलता के कारण हुआ है। अमृतसर पुलिस न केवल सुखबीर सिंह बादल की जान की सुरक्षा में लापरवाही बरती, बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पाकिस्तान के ज्ञात आईएसआई एजेंट हमलावर नारायण सिंह चौड़ा के साथ मौन सांठगांठ और मिलीभगत कर रहे थे। अमृतसर पुलिस ने सच्चाई को सामने आने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कवर-अप अभियान शुरू किया गया है। लंबे समय से चौड़ा की हिटलिस्ट में थे सुखबीर बादल डोजियर में नाम होने के बावजूद नारायण सिंह चौड़ा को 3 और 4 दिसंबर को गोल्डन टेंपल में कई बार जाने की अनुमति दी गई, जबकि उन्हें अच्छी तरह से पता था कि सुखबीर सिंह बादल श्री दरबार साहिब में सेवा करेंगे। नारायण सिंह चौड़ा को साफ रास्ता दिए जाने और सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें संकेत दिए जाने के आश्चर्यजनक वीडियो-ग्राफिक सबूत हैं। उन्हें कई मौकों पर निर्देश मिलते और पुलिस अधीक्षक हरपाल सिंह रंधावा से बातचीत करते देखा गया है। पंजाब पुलिस ने अधिकारियों ने हत्या की साजिश में मिलाया हाथ उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट है कि अमृतसर में पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने सुखबीर सिंह बादल की हत्या की साजिश में हाथ मिला लिया था। नारायण सिंह चौड़ा के साथ मौन मिलीभगत थी। जिसे अपने प्रतिबंधित, अवैध, अत्याधुनिक अर्ध-स्वचालित हथियार के साथ कई बार गोल्डन टेंपल में जाने की अनुमति दी गई थी। उसे पूरे परिसर की टोह लेने के निर्देश दिए गए थे। खासकर उस क्षेत्र की जहां सुखबीर सिंह बादल सेवा कर रहे थे।


