बढ़ती ठंड के साथ लोग ज्वार और बाजरे से बने ट्रेडिशनल फूड खाना पसंद करते हैं। महाराष्ट्र में ज्वार से बनी डिश ‘उकड’ बड़े चाव से खाई जाती है। इसी तरह साउथ में ज्वार और रागी से बने डोसा, उपमा जैसे कई व्यंजन खाए जाते हैं। राजस्थान में भी ज्वार का इतिहास अपने आप में रोचक रहा है। पहले गांव-ढाणियों में लोग बाजरे के साथ-साथ ज्वार की रोटी, लड्डू, राब का स्वाद लिया करते थे। अब पांच सितारा होटल में भी सुपर फूड से बनने वाले देसी जायके खूब पसंद किए जा रहे हैं। ऐसे ही दो लजीज जायके हैं- ज्वार के पुलाव और ज्वार-केसर का हलवा। सर्दियों में सुपर फूड से बनने वाले इन दोनों जायकों को भास्कर ऐप के पाठकों के लिए तैयार किया है होटल हिल्टन के शेफ मोहकम सिंह ने। तो फिर देर किस बात की। राजस्थानी जायका की इस कड़ी में चखते हैं इनका स्वाद… सर्दियों में खाएं ज्वार के पुलाव
होटल हिल्टन के शेफ मोहकम सिंह ने बताते हैं- पुलाव के नाम पर आमतौर पर चावल ही याद आते हैं। आज के जमाने में लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत जागरूक हैं। ज्वार को सुपर फूड माना गया है। मतलब ऐसा अनाज जो सेहत के लिए गुणकारी होता है। ऐसे में ज्वार जैसे मोटे अनाज से तैयार किया गया पुलाव का जायका आपको स्वाद के साथ अच्छी सेहत भी देगा। इस पुलाव को ज्वार के दाने और हरी सब्जियों से तैयार किया जाता है। इसे बनाने का तरीका बेहद आसान है। आइए जानें कैसे बनता है ये खास पुलाव? ज्वार के पुलाव बनाने के लिए सबसे पहले ज्वार के दाने को 24 घंटे पहले पानी में भिगो कर रख दें। जब ज्वार अच्छी तरह से फूल जाए तो इसे पानी से निकाल कर उबाल लें। थोड़े से भुने हुए प्याज डालें, ऊपर से हरे धनिये से गार्निश कर गरमा गरम सर्व करें। ज्वार के पुलाव को पालक की सब्जी के साथ भी खा सकते हैं। अगर पालक पसंद करते हैं तो उसे पुलाव में भी हरी सब्जी के तौर पर डाल सकते हैं। ज्वार और केसर का लजीज हलवा
शेफ मोहकम सिंह ने कहते हैं- सर्दी के मौसम में गाजर, बेसन, सूजी, दाल, गोंद जैसे कई हलवे खाने का प्रचलन है। बच्चे भी हलवे का गरमा गर्म जायका जी भरकर खाते हैं। हलवे के स्वाद में अगर आपको सेहत का भी ख्याल रखना है तो ज्वार-केसर का हलवा सबसे बेहतरीन विकल्प है। ये खाने में जितना स्वादिष्ट, उतना ही सेहतमंद और झटपट तैयार होने वाला है। कैसे बनता है ज्वार का हलवा? ज्वार माना जाता है सेहत के लिए गुणकारी
ज्वार में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये ‘ग्लूटन’ फ्री होने के कारण भी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। मतलब जिन लोगों को ‘ग्लूटन’ नामक प्रोटीन से एलर्जी होती है उनके लिए इससे बढ़िया विकल्प कोई नहीं है। इसमें आयरन की मात्रा भरपूर होती है जिससे खून की कमी वाले लोगों को बड़ा फायदा मिलता है। ज्वार में मिनरल, प्रोटीन के साथ विटामिन बी कॉम्प्लेक्स होता है। इसमें पोटेशियम, फाॅस्फोरस, कैल्शियम और आयरन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो इसे पोषक बनाता है। आगे बढ़ने से पहले देते चलिए आसान से सवाल का जवाब… 5000 साल से भी पुराना है ज्वार का इतिहास
अगर ज्वार के ऐतिहािसक संदर्भों में जाएं तो आज जहां सहारा रेगिस्तान है (अफ्रीका महाद्वीप), उस इलाके में करीब 10 हजार वर्ष पूर्व जंगलों में सबसे पहले ज्वार पाई गई थी। हालांकि इसकी खेती के सबसे पुराने प्रमाण 3800 से 4000 साल पहले (ईस्वी पूर्व 1800 से 2000) भारत के हड़प्पा क्षेत्र में मिले थे। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि इसकी खेती हड़प्पा से भी पहले यानी करीब 5000 साल पहले उस क्षेत्र में शुरू हुई थी, जहां आज सूडान है। आज इसकी सबसे ज्यादा पैदावार पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजीरिया में होती है। उत्पादन के मामले में भारत छठे नंबर पर आता है। इसे ‘कैमल क्रॉप’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह कम पानी और सूखे में भी आसानी से उग जाती है। पिछले राजस्थानी जायका में पूछे गए प्रश्न का सही उत्तर ये है अजमेर के दरगाह बाजार की फेमस शाही शीरमाल रोटी। एक महीने तक खराब नहीं होने वाली स्पेशल रोटी दूध व मैदा से तैयार होती है। यह हल्की मीठी रोटी ड्राई फ्रूट्स से फुली लोडेड होती है। खास बात ये है कि ये रोटी पूरे राजस्थान में केवल यहीं मिलती है। इस रोटी की डिमांड विदेशों तक है। करीब 300 ग्राम की इस रोटी को देसी घी में भिगोया जाता है…(CLICK कर पूरा पढ़ें)


