सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों की अनदेखी कर मनमाने आदेश जारी किए

भास्कर न्यूज| लुधियाना जीएसटी विभाग से व्यापारियों व टैक्स प्रोफेशनल्स को आ रही समस्याओं पर विचार-विमर्श करने हेतु टैक्सेशन वकीलों की एक विशेष मीटिंग का आयोजन मिनी सचिवालय स्थित राज्य जीएसटी विभाग के बार रूम में किया। इस बैठक में इंडियन टैक्सेशन एडवोकेट्स एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट जतिंदर खुराना ने कहा कि जीएसटी विभाग को व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए नरम और न्यायसंगत रवैया अपनाना चाहिए तथा टैक्स वसूली के लिए जबरन जुर्माने लगाने की प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने विभाग से न्यायसंगत और पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने की मांग की। इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट टैक्सेशन बार एसोसिएशन (डीटीबीए) सेल्स टैक्स के प्रधान साकेत गर्ग ने कहा कि जीएसटी विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों, विशेषकर फरवरी और मार्च में राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के दबाव में व्यापारियों पर जबरदस्ती जुर्माने लगाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में टैक्स प्रोफेशनल्स द्वारा नोटिस के जवाब में दिए गए तथ्यों को भी विभाग द्वारा अनदेखा किया जा रहा है।डीटीबीए सेल्स टैक्स के उप प्रधान विवेक शर्मा ने कहा कि कई मामलों में विभागीय अधिकारी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्णयों की अनदेखी करते हुए मनमाने आदेश जारी कर रहे हैं, जो न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। वहीं, एडवोकेट विजय बजाज ने कहा कि विभागीय अधिकारी कई बार नोटिस जारी करने के बाद, व्यापारी या उनके वकील द्वारा दिए गए उचित जवाब को अनदेखा कर एकतरफा निर्णय लेते हुए भारी जुर्माने और रिकवरी के नोटिस जारी कर देते हैं, जिससे व्यापारियों और टैक्स वकीलों में भारी रोष व्याप्त है। मीटिंग में उपस्थित अन्य वकीलों ने भी विभाग द्वारा हाल के दिनों में की जा रही सख्त चेकिंग, सर्वे और जुर्माना लगाने की कार्यवाही का कड़ा विरोध किया। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि राजस्व लक्ष्य के दबाव में अधिकारियों द्वारा एकतरफा आदेश जारी न किए जाएं तथा व्यापारियों को उचित सुनवाई का अवसर दिया जाए। एसोसिएशनों ने यह भी मांग की कि यदि किसी मामले में जांच के बाद जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द करने की आवश्यकता हो, तो नोटिस जारी होने के बाद की जाने वाली कार्यवाही में जिस तिथि को रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाए, उसे उसी तिथि से प्रभावी माना जाए। बैक डेट से रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्यवाही से न केवल संबंधित व्यापारी बल्कि अन्य व्यापारियों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस मौके पर विवेक शर्मा, नरेश गाबा, विजय बजाज, लविश ढींगरा, अमरदीप सिंह सोखी, कर्ण जोशी, सोमनाथ थम्मन, संजीव लडवाल व उपिंदर गोयल भी उपस्थित रहे।

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