सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 जुलाई 2025 को देशभर के कोचिंग संस्थानों के लिए जारी गाइडलाइन की अनुपालना सुनिश्चित करने को लेकर बुधवार को जयपुर कलेक्ट्रेट में अहम बैठक बुलाई गई, लेकिन 51 में से केवल 7 कोचिंग संचालक ही पहुंचे। इस पर जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे कोचिंग संचालकों की गंभीरता में कमी बताया और स्पष्ट किया कि गाइडलाइन की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने 5 फरवरी 2026 को अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद अधिकांश संचालकों की अनुपस्थिति पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कोचिंग संस्थानों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी एडीएम युगांतर शर्मा को सौंपी गई है। जयपुर में 65 से अधिक कोचिंग सेंटरों में करीब 3 लाख विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। त्रिवेणी, 10-बी गोपालपुरा बाईपास, महेश नगर, सूर्य नगर, गुर्जर की थड़ी, टोंक फाटक और मानसरोवर क्षेत्र कोचिंग हब के रूप में विकसित हो चुके हैं। काउंसलर नियुक्ति के दावे, रिकॉर्ड शून्य सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत कोचिंग संस्थान में काउंसलर/मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति अनिवार्य है। जब बैठक में संचालकों से पूछा गया तो उन्होंने मौखिक रूप से नियुक्ति की बात कही, लेकिन रिकॉर्ड मांगे जाने पर कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। अंकों के आधार पर बैच पर एतराज: 70–80%, 80–90% या 95% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों के आधार पर अलग-अलग बैच बनाने पर भी कलेक्टर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था पर सख्ती गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र में कोचिंगों के कारण यातायात बाधित और एलिवेटेड रोड निर्माण को देखते हुए निर्देश दिए कि कोई भी कोचिंग संस्थान अपने परिसर के बाहर वाहन पार्क नहीं कराएगा। उल्लंघन मिलने पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करेगी। फायर NOC पर सवाल, औचक निरीक्षण के निर्देश बैठक में निगम के फायर प्रतिनिधि अग्निशमन यंत्रों की स्थिति पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर कलेक्टर ने फायर एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और औचक निरीक्षण के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि उपकरणों में खामियों के चलते जयपुर की कोचिंग में कोई बड़ी घटना हो जाए, ऐसा कलंक मत लगने देना।


