राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को झालाना स्थित आरआईसी में जेल रिफॉर्म पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस बीआर गवई ,सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव सहित अन्य न्यायाधीश भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस बीआर गवई ने रालसा की ओर से न्याय सो साथी पाक्षिक पत्रिका और डायरी का विमोचन किया । साथ ही रालसा की डायरी का भी किया गया विमोचन। रालसा की ओर से दिव्यांग बच्चों के लिए भी उडान स्कॉलरशिप की भी शुरुआत की गई। इस स्कॉलरशिप में 100 दिव्यांग बच्चों को 2500 रूपए प्रतिमाह दो वर्ष तक दिए जाएंगे। कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जसराज चोपड़ा को भी रालसा को एक करोड़ रूपए देने के लिए सम्मानित किया गया । सेमिनार को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता ने बंदियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए खुले बंदीगृह की परिकल्पना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खुले बंदीगृह में अन्य बंदी गृहों से अधिक खर्च होता है और संसाधनों की जरूरत पड़ती है । लेकिन राजस्थान में बनाया गया खुला बंदीगृह देश के लिए नजीर है। बंदियों को समाज की मुख्य धारा में लाने और उनके पुनर्वास के लिए सरकार को खुले बंदी गृहों की संख्या को बढ़ाना चाहिए। खुले बंदीगृह में बंदी अपने परिवार के बीच रहता है और रोजाना मेहनत कर अपना गुजारा करता है। उन्होंने कहा कि देश में जेलों में बढ़ती बंदियों की संख्या को देखते हुए अदालतों को कई बार गंभीर प्रकृति के अपराधों में लिप्त व्यक्ति को भी जमानत देनी पड़ती है। ऐसे में खुला बंदीगृह एक विकल्प है। जेल में बंद बंदियों की पैरोल, दिहाड़ी सहित अन्य मामलों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस दिशा में सुधार करना चाहिए ।


