अजमेर, हाईकोर्ट और स्कूलों को उड़ाने की धमकी वाले ईमेल के तार पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से जुड़े हैं। यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल में हुआ है। दो साल में देश भर में ऐसे 2500 ईमेल भेजे मिले हैं। इंग्लैंड की वीपीएन के सर्वर से जंप करवाकर ये मेल भेजे गए थे। इसी तरह दो साल पहले अमेरिका में रहने वाले खालिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू ने भी इसी तरह की भाषा में लिखे मेल किए थे। धमकी वाले मेल को खुफिया एजेंसियां आईएसआई साइको ऑप्स का हिस्सा बता रही हैं। इसका उद्देश्य लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप डराने की साजिश हैं। पाकिस्तानी सेना का जनसंपर्क विभाग, आईएसपीआर साइबर वॉरफेयर के लिए जाना जाता हैं। ये एजेंसी साइबर स्पेस में साइबर ऑपरेशन करता रहता है, इसके लिए हैकर्स ग्रुप का समूह एपीटी ग्रुप और मारखोर साइबर डिफेंस जैसी स्पेशल साइबर टीम को फंडिंग की जा रही हैं। इसका मुख्यालय रावलपिंडी हैं, जबकि साइबर ग्रुप लाहौर से ऑपरेट हो रहे है। जांच एजेंसियों को वीपीएन नहीं दे रहा डाटा
धमकी वाले ईमेल की ट्रेकिंग बहुत ही मुश्किल है। मेल भेजने वाला यूजर वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं। इससे दो या तीन देशों तक आईपी एड्रेस जंप करवाने के बाद इस्तेमाल किया जाता है। इसे ‘आईपी होपिंग’ कहते है। इससे असली आईपी तक पहुंचाना संभव नहीं है। वीपीएन को आईपी जारी करने वाली कंपनियों से डेटा निकलवाने में दो देशों के कानून और कूटनीतिक जटिलता आड़े आ रही हैं। ऐसे मामलों की जांच के दौरान साइबर जांच एजेंसियां को आईपी एड्रेस की डिटेल चाहिए तो उसे अन्य देशों के साथ हो रही संधि म्युचल असिस्टेंस लीगल ट्रीटी के तहत लीगल अनुरोध की प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। दुनियाभर में जितने बड़े वीपीएन चल रहे हैं उनके पीछे आईपी एड्रेस और सर्वर प्रोवाइडर कुछ अन्य कंपनियों से लिया जाता है। आईजी ने कहा- तकनीकी समस्या से अंतिम यूजर तक पहुंचने में दिक्कत आ रही
“धमकी भरे ईमेल की जांच के दौरान कई तरह की तकनीकी समस्या आती हैं। इसके चलते कई बार अंतिम यूजर तक पहुंचने में भी परेशानी आ रही हैं।”
-विकास कुमार, आईजी, एटीएस-एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स एजेंसियों को आईएसआई पर शक
धमकी भरे ईमेल की जांच में एजेंसी अंतिम यूजर तक नहीं पहुंची है, लेकिन पैटर्न और कंटेंट के आधार पर ईमेल का ओरिजिन पाकिस्तान में होने का पता चला है। इनमें खालिस्तान और अफ़ज़ल गुरु का ज़िक्र है जो जिससे आईएसआई के साइको ऑपरेशन का हिस्सा हैं। ये मेल मोबाइल डिवाइस से भेजे जा रहे हैं। वीपीएन पर रोक लगनी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट- नीलेश पुरोहित, साइबर एक्सपर्ट


