झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को बोकारो फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें पति-प|ी के विवाद में दांपत्य बहाली का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि प|ी द्वारा लगाए गए गंभीर क्रूरता के आरोपों की जांच किए बिना ऐसा आदेश देना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने प|ी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि यदि पति का व्यवहार प|ी की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करता हो या परिस्थितियां उसके लिए असुरक्षित हों तो दांपत्य अधिकार बहाली का आदेश नहीं दिया जा सकता। ऐसे मामलों में केवल पति के वैवाहिक अधिकारों पर नहीं, बल्कि प|ी की सुरक्षा, सम्मान और परिस्थितियों पर भी समान रूप से विचार करना आवश्यक है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्य और प|ी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया। मालूम हो कि प|ी ने पति व उसके परिजनों पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। महिला थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। खंडपीठ ने कहा कि जब प|ी को जान का खतरा की आशंका हो और क्रूरता के आरोप पहली नजर में सामने हों, तब उसे पति के साथ रहने का आदेश देना उचित नहीं ठहराया जा सकता।


