भास्कर न्यूज| अमृतसर सुल्तानविंड इलाके में 4 मंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस की कार्रवाई खत्म हो चुकी तो निगम ने अंदरखाते शुरू कर दी है। लेकिन एमटीपी विभाग की तरफ से जो भी कार्रवाई की जा रही उसकी रिपोर्ट छिपाई जा रही है। निगम सूत्रों की माने तो एमटीपी अंगद दवार वीरवार को मौके पर पहुंचे थे। आसपास के लोगों से बातचीत भी की गई है। लेकिन सवाल उठ रहे कि इलाकों में बिल्डिंग खड़ी हो जाती है, पर अफसरों को भनक क्यों नहीं लग पाता। जब शुरुआत में ही निर्माण शुरू कराया जाता है तो एटीपी व बिल्डिंग इंस्पेक्टर क्या करते हैं। कोई हादसा होने के बाद ही निगम के जिम्मेदार अफसर क्यों अपनी नींद से जागते हैं। गौर हो कि बुधवार को दोपहर करीब 1:10 बजे अचानक ही 4 मंजिला बिल्डिंग भरभराकर गिर पड़ी थी। जिसके बाद थाना बी-डिवीजन के एसएचओ बलजिंदर सिंह मौके पर पहुंचे थे। मिस्त्री का पैर सरिया में फंस गया था। एसएसओ बलजिंदर ने बताया कि मजदूर व मिस्त्री घायल हुए थे दोनों ही पूरी तरह सुरक्षित हैं। निगम के अफसर क्या कार्रवाई करेंगे वही जानेंगे। गौर हो कि कोई भी बिल्डिंग निर्माण से पहले एमटीपी विभाग से परमिशन लेना होता है। वहां पर कॉमर्शियल-रेजीडेंशिय ल कौन सी एक्टिविटी करवाई जानी है, सारा खाका एमटीपी विभाग में ही बनता है। लेकिन शहरों में अवैध बिल्डिंग खड़ी हो जाने के बावजूद अफसरों को पता नहीं चल पाता। या फिर मिलीभगत के कारण दिखावे की कार्रवाई की जाती है। यह बात अलग है कि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो अफसरों-मुलाजिमों के खिलाफ सस्पेंशन या ट्रांसफर की कार्रवाई खानापूर्ति के लिए कर दी जाए। ताकि लोगों का गुस्सा न भड़के। वार्ड-47 के पार्षद किरणदीप के पति वरपाल सिंह ने बताया कि लेबर लगाकर मलबा हटवा दिया गया है। जिससे आने-जाने का रास्ता शुरू हो गया है। लेकिन हादसे से निगम अफसरों को सबक लेना चाहिए। यदि कोई बड़ी अनहोनी होती तो जिम्मेदार कौन होता। मामले को लेकर एटीपी अंगद दवार से कई बार संपर्क किया गया। लेकिन चुप रहना जरूरी समझा। कुछ ऐस ही हाल एमटीपी व निगम के उच्च अफसरों का भी है।


