सुविधाएं पूरी, इलाज शून्य…:नर्सों के भरोसे 10 बिस्तर अस्पताल, दोपहर के बाद ‘डॉक्टर फ्री’

करोड़ों की लागत से बने नवा रायपुर के 10 बिस्तरी शासकीय अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से दोपहर बाद इलाज ठप हो जाता है। सुविधाएं मौजूद हैं, पर मरीजों को 5 किमी दूर जाना पड़ रहा है। शासकीय अस्पताल भवन, ईसीजी मशीन, एक्सरे कक्ष, मेजर ओटी और पैथोलॉजी लैब जैसी सुविधाओं से लैस है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा। डॉक्टर्स नहीं होने के कारण नर्स मरीजों का इलाज कर रही हैं। अस्पताल भवन और उपकरणों पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने यहां आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, लेकिन डॉक्टरों की नियुक्ति न होने से यह निवेश अधूरा साबित हो रहा है। हाल ही में नगर सैनिक कार्यालय के एक कर्मचारी को उल्टी और चक्कर की शिकायत पर यहां लाया गया, लेकिन डॉक्टर मौजूद नहीं थे। उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा। पड़ताल के दौरान पता चला कि इस सरकारी अस्पताल में पहले 40 से 50 मरीज रोज आते थे, लेकिन अब सुबह 10 से 20 मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन दोपहर बाद अस्पताल लगभग खाली हो जाता है। डॉक्टर न मिलने के कारण मरीजों को 5 किमी दूर राखी स्थित अस्पताल जाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष परेशानी हो रही है। अस्पताल में सन्नाटा, कमरे बंद और इलाज का इंतजार भास्कर टीम की पड़ताल में ओपीडी कक्ष खुला मिला, पर मरीज नहीं थे। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर एक कर्मचारी बैठा मिला। वार्ड में 10 बिस्तर करीने से लगे थे, चादरें साफ थीं, पर एक भी मरीज भर्ती नहीं था। ईसीजी मशीन कोने में ढकी हुई रखी थी। एक्सरे कक्ष का दरवाजा बंद था। लैब में टेक्नीशियन मौजूद थे, जिन्होंने बताया कि जांच तो कर देते हैं, लेकिन डॉक्टर न हों तो रिपोर्ट देखकर इलाज कौन बताए? मेजर ओटी तैयार है, उपकरण व्यवस्थित हैं, लेकिन महीनों से कोई बड़ी सर्जरी नहीं हुई।
ये भी बड़ी वजह… इस सरकारी अस्पताल में 3 पद स्वीकृत, तैनात एक ही डॉक्टर
अस्पताल में तीन डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल एक डॉक्टर बॉन्ड पर पदस्थ हैं। उनकी ड्यूटी दोपहर 2 बजे के बाद इंद्रावती भवन में लगा दी जाती है। इससे अस्पताल दोपहर बाद डॉक्टरविहीन हो जाता है। स्टाफ नर्स, एनएम, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट सहित अन्य पद स्वीकृत हैं, लेकिन कई पद खाली या अटैच हैं। पड़ताल के दौरान एक स्टाफ नर्स, एक एनएम, एक आया और एक टेक्नीशियन ही मौजूद मिले। नर्स दे रहीं दवा, गंभीर मरीज रेफर
अस्पताल में फार्मासिस्ट की भी तैनाती नहीं है। ऐसे में मरीजों को स्टाफ नर्स ही प्राथमिक जांच कर दवा दे रही हैं। नर्स ही ब्लड प्रेशर, शुगर जांच कर दवा देती हैं। गंभीर केस हो तो रेफर कर दिया जाता है। जल्द दूर की जाएगी समस्या
अस्पताल में बॉन्ड पर एक डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। वहां की स्थिति की जानकारी लेता हूं। समस्या को जल्द से जल्द दूर की जाएगी।
-डॉ. मिथलेश चौधरी, सीएमएचओ

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