सुशासन दिवस पर गूंजे पूर्व पीएम के विचार:जिले भर में दी श्रद्धांजलि, सुशासन के रूप में प्रेरणा लेने की अपील

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर बुधवार को जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय में सुशासन दिवस मनाया गया। जिला कलेक्टर कानाराम, जनप्रतिनिधि देवेंद्र पारीक, अमित सहू, सीईओ ओपी बिश्नोई ने वाजपेयी की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलित किया। प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर जिला कलेक्टर ने अधिकारियों, साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों को प्रदेश में सुशासन के उच्चतम मापदंडों को स्थापित करने के लिए, शासन को अधिक पारदर्शी, सहभागी, जनकल्याण केंद्रित और जवाबदेह बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करने और प्रदेश के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लक्ष्य को पाने के लिए सदैव तत्पर रहने की शपथ दिलाई। जिला कलेक्टर ने कहा कि अटल जी के जीवन से सुशासन के रूप में प्रेरणा ले सकते हैं और जीवन में उतार सकते हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुशासन का सामान्य अर्थ है, ऐसा शासन जिसमें जनता सर्वोपरि हो। सुशासन में जवाबदेह, संचार, कानून का शासन, कनेक्टिविटी जरूरी है। कनेक्टिविटी के मामले में अटल जी की सोच दूरगामी थी। उन्होंने गांवों को शहरों से जोड़ा। किसानों को साहूकारों के चंगुल से निकालने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड दिया। आज अधिकतर किसान केसीसी से जुड़े हुए हैं। शिक्षा एवं स्वास्थ्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और सर्व शिक्षा अभियान जैसे विचारों का क्रियान्वयन किया। कलेक्टर ने कहा कि अटल जी के विचारों में नवीन भारत की झलक दिखती थी। चाहे वो भारत की विदेश नीति हो या विज्ञान नीति। उनके विचार की “हम अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी को नहीं” आज भी प्रासंगिक हैं। विज्ञान को लेकर उनकी सोच जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान वाली रही। परमाणु परीक्षण से देश को सशक्त राष्ट्र के रूप में निखारा। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा में दिया गया उनका भाषण राष्ट्र के मूल्यों पर गर्व की अनुभूति करवाता है। जीवन में उतारें अटल जी के मूल्य
जिला कलेक्टर ने कहा कि लोकसेवक के तौर पर जब हम गुड गवर्नेस के बारे में बात करते हैं, तो हमारा आचरण अच्छा होना जरूरी है। जिससे जनता में विश्वास बढ़े। कलेक्टर ने कहा कि इस दिवस की सार्थकता तभी है, जब हम अटल जी के मूल्यों को जीवन में उतारें। अधिकारी अगर नागरिकों को प्रथम रखते हुए कार्य करेंगे, तो फिर सुशासन दिवस की आवश्यकता नहीं होगी। राष्ट्र को हमेशा सर्वोपरी रखा
जनप्रतिनिधि देवेंद्र पारीक ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्र को हमेशा सर्वोपरी रखा। आजकल संसद के परिदृश्य को देखकर अटल जी के पथ पर चलना अधिक आवश्यक हो जाता है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि अटल जी “सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए” जैसे विचारों वाले महान विचारक थे। नदियों को जोड़ने का सपना जो उन्होंने तब देखा, उसे सरकार अब पूरा कर रही है। सुशासन दिवस कहने से सुशासन नहीं आएगा, हम सबको मिलकर भारत को आगे लेकर जाना होगा। अटल जी के साथ के संस्मरण हुए साझा
बाल साहित्यकार दीनदयाल शर्मा ने अटल जी पर पहेलियां, साहित्यकार प्रेम भटनेरी, विनोद यादव, नरेश मेहन, वीरेन्द्र छापोला ने स्वयं लिखी कविताओं, शायरियों, अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का पठन किया। वरिष्ठ जनप्रतिनिधि प्रेम बंसल ने अटल बिहारी वाजपेयी के हनुमानगढ़ आगमन के विशेष किस्से सुनाए। वरिष्ठ पत्रकार गोपाल झा ने सुशासन दिवस की सार्थकता एवं अटल बिहारी वाजपेयी के साथ संस्मरणों को साझा किया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओपी बिश्नोई ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन भीष्म कौशिक ने किया। संगोष्ठी में सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा, कोषाधिकारी कृष्ण शर्मा, नगर परिषद आयुक्त सुरेंद यादव, सीडीईओ पन्नालाल कड़ेला, एसडीएम मांगीलाल, श्रम विभाग से देवेंद्र मोदी, महिला एवं बाल विकास के उप निदेशक प्रवेश सोलंकी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सहायक निदेशक प्रेमाराम, एसीईओ देशराज बिश्नोई, एपीआरओ राजपाल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

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