सुसाइड नोट छोड़कर दो बेटियों के साथ महिला लापता:लिखा-बेहोश होने तक पीटते हैं; इंदिरा गांधी नहर किनारे चप्पल-लुगड़ी भी मिली

बीकानेर में इंदिरा गांधी नहर किनारे चप्पल-लुगड़ी, सुसाइड नोट और ज्वलेरी छोड़कर महिला दो बेटियों के साथ लापता हो गई। नहर में कूदकर सुसाइड की आशंका पर SDRF और गोताखोरों की मदद से सर्च किया जा रहा है। फिलहाल महिला का कोई सुराग नहीं लगा है। घटना शुक्रवार सुबह 10 बजे छतरगढ़ थाना क्षेत्र की है। सुसाइड नोट में लिखा- मेरा पति और सास मिलकर मुझे रात में पीटते हैं। घंटों तक होश नहीं आता। मैं अपनी बच्चियों को आत्महत्या करने के लिए साथ ले जा रही हूं। मेरी सास शराब की आदी है, मेरी बच्चियों का वारिश कौन होगा? पुलिस से अपील है पति और सास के अलावा किसी और को झूठा दोषी नहीं ठहराया जाए। मैं बहुत परेशान हूं। सुसाइड नोट में मारपीट और दहेज प्रताड़ना का आरोप खाजूवाला DSP अमरजीत चावला ने बताया – सतासर के पास नहर किनारे महिला के चप्पल और लुगड़ी मिले हैं। गले के हार से दबा हुआ सुसाइड नोट मिला है। सूचना मिलते ही छतरगढ़ थानाधिकारी नवनीत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास के क्षेत्र में जांच शुरू की। फिलहाल पुलिस और एसडीआरएफ की टीम नहर में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है और युवती का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण भी अपने स्तर पर महिला की तलाश में पुलिस की मदद कर रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। दो पेज के सुसाइड नोट में ससुराल पक्ष पर मारपीट और परेशान करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस परिजनों पूछताछ के साथ ही सुसाइड में लिखी जानकारी की भी जांच कर रही है। लिखा-मुझे रात में पिटते हैं मेरा नाम … है। मेरे पति का नाम …. है और मेरा गांव … है। वह (पति) पिछले एक साल से हर दिन मेरे साथ मारपीट करता है। वह रोज गाली-गलौच करता है और उसकी मां, जो मेरी सास है, वह भी मेरे साथ मारपीट करती है। मेरी सास भी साथ मिलकर मुझे रात को पीटती है। जब मेरे घरवाले अचानक आए तो उन्होंने कुछ नहीं किया। अपने परिवार वालों ने भी मेरे साथ मारपीट की। जब मैं पुलिस थाने नाल जाने लगी तो मेरी सास ने मुझे पकड़ लिया और मेरे पति को बुलाया, जो उस समय बाहर था। फिर उन्होंने मुझे अंदर बंद कर दिया और मेरे साथ मारपीट की। इतनी मारपीट की कि मैं बेहोश हो गई। ‘बेहोश होने तक पीटते हैं’ करीब आधे घंटे बाद मुझे होश आया। बाद में मैंने सोचा कि मैं मर जाऊं। फिर दो दिन बाद मैं वहां से जाने लगी। जब मैं गली से निकल रही थी तो मेरे पति ने मुझे पकड़ लिया। वह मुझे वापस ले आया और फिर मारपीट की। तब मैंने सोचा कि इस जिंदगी से तो मर जाना ही अच्छा है। मैंने ऐसा सोचा भी नहीं था कि मेरे साथ ऐसा होगा। वह मुझे मेरी मां के पास भी नहीं जाने देते हैं। मुझे अपनी जान का खतरा है। मेरा पति और मेरी सास मिलकर मेरे साथ मारपीट करते हैं। मुझे मेरे पापा के घर भेज दिया गया। मेरे पापा और मम्मी का तलाक हो चुका है। फिर भी मेरे ससुराल वालों के साथ मिलकर मुझे मेरे घर बुलाया गया। वहां मेरे पापा … और मेरे पति-ससुर ने मुझे इतना पीटा कि दो घंटे तक मुझे होश नहीं आया। इसके बाद दूसरे दिन मेरे पापा के साथ मुझे मालीगढ़ भेज दिया गया। लिखा-पति और सास जिम्मेदार मैना ने लिखा- मैं अपनी बच्चियों को साथ में ले जा रही हूं आत्महत्या करने के लिए। क्योंकि मेरी सास शराब की आदी है और मेरे जाने के बाद मेरी बेटियों का वारिस कौन बनेगा? पुलिस से अपील की है कि उसकी मौत के लिए पति … और सास … को जिम्मेदार है। इनके बहकावे में आकर किसी और झूठा दोषी नहीं ठहराया जाए। कंटेंट: अलंकार गोस्वामी, बीकानेर

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