विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में आयोजित बाबा श्याम का वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेला प्रसिद्ध सूरजगढ़ का निशान चढ़ने और भोग आरती के साथ विधिवत संपन्न हो गया। हर साल की तरह इस बार भी सूरजगढ़ का निशान 152 किलोमीटर दूर से खाटू पहुंचा, जिसे मंदिर शिखर पर चढ़ाया गया। द्वादशी पर बाबा श्याम को खीर चूरमे का भोग लगाया गया। हालांकि मंदिर कमेटी के अनुसार, इस बार 8 दिन चले वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेले में 15 लाख श्रद्धालुओं ने मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन किए, जो पिछली बार की तुलना में करीब 5 लाख कम है। पिछली बार 12 दिन चले मेले में करीब 20 लाख भक्त खाटू धाम पहुंचे थे। आठ दिन तक चले इस आस्था पर्व का समापन भोग आरती और परंपरागत निशान चढ़ाने की रस्म के साथ हुआ, लेकिन मेले की रौनक अब भी बरकरार है और श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार उमड़ रहा है। वहीं अफवाहों और बोर्ड परीक्षाओं का असर भी भीड़ पर देखने को मिला। इसके बावजूद समापन के बाद भी 14 लाइनों में लगकर भक्त बाबा श्याम के दर्शन कर रहे हैं। देखिए, बाबा श्याम का वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेला की PHOTO’S
3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण बंद रहेंगे पट श्रीश्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण खाटू श्याम बाबा के पट पूरे दिन बंद रहेंगे। फिर 4 मार्च सुबह साढ़े 5 बजे मंगला आरती के साथ ही भक्तों के लिए पट खुल जाएंगे। इसी के साथ 4 मार्च को रात 9 बजे विशेष सेवा पूजा और तिलक श्रृंगार होने के कारण पट बंद हो जाएंगे और 5 मार्च की शाम 5 बजे फिर से पट खुल जाएंगे। चंद्र ग्रहण के कारण होली पर इस पर कम भक्त खाटू रुकेंगे चौहान ने कहा कि मेले के समापन की घोषणा के बाद भक्त बाबा श्याम के दर्शन कर वापस अपने घरों को लौटना शुरू हो गए हैं। इस बार होली के त्योहार के बीच में चंद्रग्रहण होने के कारण बाबा श्याम के साथ होली खेलने के लिए श्याम नगरी में रुकने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कम है और जो भक्त रुके हुए हैं वो होली के बाद ही खाटू धाम से रवाना होंगे। 15 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के किए दर्शन मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि खाटू में फाल्गुनी लक्खी मेला 21 फरवरी से 28 फरवरी तक बड़े ही धूमधाम से आयोजित किया गया। इस बार देशभर से 15 लाख से ज्यादा भक्तों ने खाटूनगरी पहुंचकर बाबा श्याम के दर्शन किए। पिछले साल 2025 में लक्खी मेले में मंदिर कमेटी के अनुमान के मुताबिक करीब 20 लाख भक्त आए थे। पिछले साल के मुकाबले इस साल मेले में भक्तों की संख्या 5 लाख कम रही है, जबकि मेले की अवधि भी 4 दिन कम थी। खाटू मेले में इस बार VIP लाइन भी भक्तों के लिए खुली रही मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि इस बार खाटू मेले में वीआईपी दर्शन पूरी तरह से बंद थे। वीआईपी लाइन भी भक्तों के लिए खुली थी। पुलिस-प्रशासन की ओर से जगह-जगह टीनशैड लगाने से भी भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पार्किंग्स की खाटू कस्बे से दूरी होने के कारण भी भक्तों की भीड़ कम रही। CBSE और राजस्थान बोर्ड की परीक्षा, मेले से पहले 45 किलोमीटर पैदल चलने की अफवाह और खाटू-जयपुर बसों की हड़ताल का प्रभाव भी मेले में देखने को मिला। शांतिपूर्ण संपन्न हुआ मेला वार्षिक मेले के दौरान छोटी-मोटी घटनाओं और परेशानियों को अगर छोड़ दिया जाए तो मेला पूरी तरह से शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। जिसके चलते जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और स्थानीय प्रबंधन ने अब राहत की सांस ली है। जिला प्रशासन की ओर से इस बार श्याम भक्तों के लिए सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पिछले साल के मुकाबले इस बार अधिक पुलिस जाब्ता मेले में तैनात किया गया था। श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से भी भक्तों को श्रद्धालुओं की सुविधा और सहायता के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की गई थीं। सूरजगढ़ से खाटू श्याम निशान यात्रा: जानिए, आस्था की अमर गाथा खाटू श्याम जी के लाखों भक्त विश्वभर में फैले हैं, लेकिन सूरजगढ़ से निकलने वाला निशान (ध्वजा) अपनी अनूठी आस्था और इतिहास के लिए विशेष पहचान रखता है। मुगल शासनकाल में लगभग 1779 के आसपास जब मुगलों ने खाटू मंदिर को ध्वस्त करने की साजिश रची, तो सूरजगढ़ के ठाकुर सूरजमल सिंह ने अपने जाबांज योद्धाओं, आम जनता और श्रद्धालुओं के साथ तलवारें उठाईं। सूरजगढ़ से खाटू तक पदयात्रा कर उन्होंने तीन माह तक मुगलों से युद्ध लड़ा और मंदिर की रक्षा की। इसी प्रकार अंग्रेजी काल में जब अंग्रेजों ने मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर आस्था पर ठेस पहुंचाने की कोशिश की, तो मंगला भगत ने मोर छड़ी से ताले पर प्रहार कर उसे खोल दिया। डर के मारे अंग्रेज पीछे हट गए। तब से मंदिर कमेटी ने निर्णय लिया कि सूरजगढ़ का निशान पूरे वर्ष मुख्य शिखर पर लहराएगा। यह परंपरा आज भी जीवंत है, जो सूरजगढ़ की भक्ति और बलिदान की प्रतीक बनी हुई है। —————– बाबा श्याम के मेले से संबंधित ये खबर भी पढ़िए… डेढ़ करोड़ के रथ में नगर भ्रमण पर निकले खाटूश्यामजी:नाचते-गाते चले श्रद्धालु, रंग-गुलाल उड़ाया; भक्तों पर लुटाया बाबा का खजाना बाबा खाटूश्यामजी के मेले में आज सबसे बड़ा दिन है। बाबा श्याम डेढ़ करोड़ की चांदी के रथ पर नगर भ्रमण के लिए निकले। 125 किलो चांदी से बने रथ से बाबा श्याम ने भक्तों पर अपना खजाना लुटाया। शहर भ्रमण के दौरान बाबा के रथ पर फूलों की बरसात की गई। भक्त रथ के साथ नाचते-गाते चले। भक्त रंग-गुलाल से होली खेल रहे थे। यह 350 साल से चली आ रही परंपरा है।(पूरी खबर पढ़ें)


