सूलर घराट और ढंढोली में पानी की टंकी, दिड़बा व खेतला में मोबाइल के टावर पर चढ़े अध्यापक

भास्कर न्यूज | संगरूर बराबर वेतन दिए जाने की मांग को लेकर 13 अध्यापक सूलर घराट, ढंढोली कलां, दिड़बा और खेतला में पानी की टंकियों और मोबाइल टावर पर चढ़ गए। आरोप है कि वित्त मंत्री हरपाल चीमा बैठक का समय देकर मुकर चुके हैं ऐसे में अध्यापक वित्त मंत्री से बैठक के समय की मांग कर रहे थे। इसके चलते पंजाब भर में दिड़बा हलके में गुप्त ढंग से पहुंचे 6 अध्यापक सबसे पहले सुबह साढ़े 10 बजे सूलर घराट में पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। इसके हर आधे घंटे बाद अध्यापक दूसरे स्थानों पर पानी की टंकी और मोबाइल टावरों पर चढ़ना शुरू हो गए। दोपहर 1 बजे तक 13 अध्यापक विभिन्न स्थानों पर चढ़ गए थे। अध्यापकों के रूख को देखते हुए प्रशासन की ओर से दोपहर 1:30 बजे 5 मार्च को अध्यापकों की वित्त मंत्री से बैठक करवाने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद दोपहर 2 बजे सभी को नीचे उतार लिया गया। ईटीटी टेट पास अध्यापक एसोसिएशन 180 (जय सिंह वाला) के पंजाब प्रधान कमल ठाकुर ने बताया कि 2016 में शिक्षा विभाग ने 4500 और 2005 पदों के लिए विज्ञापन जारी किए थे। इसमें जनरल कैटागिरी की आयु सीमा 37 वर्ष थी। दोनों भर्ती की प्रक्रिया एक साथ होने के कारण अध्यापकों की ओर से दोनों भर्ती में आवेदन दिया गया था। दोनों भर्ती की फाइनल मेरिट सूची में एसोसिएशन सदस्यों के नाम शामिल थे। लेकिन विभाग ने दोनों भर्तियों में नौकरी सुरक्षित होने का हवाला देकर किसी एक भर्ती में नियुक्ति लेने के लिए कहा गया था। इसके बाद अध्यापकों ने मेरिट के आधार पर 4500 भर्ती में नियुक्ति को प्राप्त कर लिया। जूनियर अध्यापकों ने 2005 वाली भर्ती में ज्वाइन कर लिया। अंत में 2005 भर्ती में जनरल कैटागिरी के उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण 256 पद खाली रह गए थे। इसके बाद जनरल कैटागिरी के ओवरऐज उम्मीदवारों की ओर से अदालत में केस कर दिया। केस के चलते नौकरी के 2 वर्ष बाद 2018 में 4500 अध्यापकों की भर्ती में अधिक भर्ती का हवाला देकर 180 अध्यापकों को अचानक नौकरी से बाहर निकालने का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद 180 अध्यापक भी कोर्ट में चले गए थे। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अध्यापक नेता गुरप्रीत सिंह, अजायब सिंह, गुरमुख सिंह और गौरव कांत ने कहा कि विभाग ने भर्ती के 2 वर्ष बाद 6वां वेतन कमीशन लागू कर दिया। जबकि 180 अध्यापकों पर 7वां वेतन कमीशन लागू कर दिया गया। इस कारण इन 180 अध्यापकों का वेतन आधा रह गया। एक साथ भर्ती हुए अध्यापकों के वेतन में इतना बड़ा फर्क नियमों के उल्ट है। इस संबंधी उनकी शिक्षा मंत्री समेत आला अधिकारियों के साथ दर्जनों बैठकें हो चुकी हैं लेकिन सिवाए आश्वासन के कुछ प्राप्त नहीं हुआ है। ऐलान किया गया कि यदि 5 मार्च को मांगों सभी हल न किया गया तो दोबारा से गुप्त एक्शन किया जाएगा। विभाग में खाली पड़े पदों को भरने की मांग मांग की गई कि सभी अध्यापकों को एक समान वेतन जारी किया जाए। सभी अध्यापकों पर 6वां वेतन कमीशन लागू किया जाए। विभाग में खाली पड़े पदों को तुरंत भरा जाए।

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