सैम बहादुर के साथ रहे रिटायर कमांडेंट पुरोहित:पाक से युद्ध में शामिल कर्नल शमशेर कक्कड़ ने बताए अनुभव

श्रीमती बहुरा साहू के पुत्र प्रमोद साहू की रिपोर्ट पाक को 1971 में 1 माह में खदेड़ा, अब उसे तबाह करने में लगेगा 1 घंटा: पुरोहित 1971 में एक माह में हमारी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर उसकी सेना को खदेड़ा दिया था। आज देश इतना ताकतवर है कि पाकिस्तान को तबाह करने में सिर्फ एक घंटा लगेगा। यह कहना है रायपुर के बूढ़ापारा में जन्मे 80 साल के रिटायर्ड कमांडेंट मधुसूदन लाल पुरोहित का। वे 1961 में गोरखा रेजिमेंट में शामिल हुए। सेना में कैप्टन थे। पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ उर्फ सैम बहादुर के साथ काम कर चुके हैं। बीएसएफ कमांडेंट बनकर रिटायर हुए। कमांडेंट पुरोहित ने बताया, ‘1971 में पूर्वी इलाके मेरी बटालियन बाड़मेर में तैनात ​थी। तभी पाकिस्तान से हमला कर दिया। 200 जवानों के साथ हम जवाब देते हुए आगे बढ़े। पाक की सीमा पार कर 40 किमी अंदर घुस गई। हमारे जवानों के साहस से पाकिस्तानी सैनिक भाग खड़े हुए। एक माह तक पाकिस्तान में घुसे रहे। इसी दौरान सीजफायर हो गया। हमारा वायरलेस बंद था, इसलिए जानकारी नहीं थी। राशन भी खत्म हो गया था। गांव वालों ने हमारे खाने का इंतजाम किया। सरकार ने हमें मिसिंग मान लिया था। एक दिन सेना के जनरल इलाके का हवाई निरीक्षण कर रहे थे। तब उन्हें संकेत दिया। उन्होंने हेलीकॉप्टर उतारा और फोर्स ने हमें तलाश लिया। हम बाड़मेर पहुंचे। मैं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की सुरक्षा में भी तैनात रहा।’ ऑफेंस इज द बेस्ट डिफेंस… भारत के लिए यही नीति सबसे अच्छी: कक्कड़ ऑफेंस इज द बेस्ट डिफेंस सबसे अच्छी नीति है। भारत जो अभी कर रहा है, वह सही है। 1947 से अब तक कई बार पाकिस्तान से भारत बातचीत कर चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक की। 94 हजार सैनिकों को बिना शर्त पाक को लौटा दिए। अगर भारत तब सख्त कदम उठाता तो इन सैनिकों के बदले पूरा कश्मीर ले चुका होता। लेकिन ऐसा नहीं किया। यह कहना है रायपुर के भाठागांव के रहने वाले रिटायर कर्नल शमशेर सिंह कक्कड़ का। वे 1971 के युद्ध में सुरंग विस्फोट में पैर गंवा चुके हैं। सिंह के मुताबिक, ‘मेरा जन्म पाकिस्तान के पेशावर में हुआ। बंटवारे के बाद परिवार भारत आ गया। दादा, पिता दोनों सेना में थे, तो मैं भी सेना में पहुंच गया। 1971 की लड़ाई में राणा सांगा की तरह हमने युद्ध किया। पैर के चिथड़े होने के बाद भी मैं डटा रहा। मेरे नेतृत्व में हमारी टुकड़ी ने उरी पोस्ट को पाक से छीन लिया। इस साहस के लिए उरी पोस्ट का नाम कक्कड़ पोस्ट कर दिया गया। आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर पर बड़ी संख्या में मदरसे हैं। यहीं से हजारों आतंकियों को तैयार किया जा रहा है। पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ कह रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर मदरसों के छात्रों को भी युद्ध में इस्तेमाल किया जाएगा। वे हमारी सेकेंड डिफेंस लाइन हैं। इससे साफ है कि पाक आतंकियों को पालता रहेगा।’

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