ये कहानी है पांचवीं तक पढ़े ऐसे किसान की, जिसने गांव के बच्चों को शिक्षित करने के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई स्कूल को दान कर दी। राजस्थान के डूंगरपुर जिले के घटाऊ ग्राम पंचायत के 62 साल के माधु रेबारी ने खेती और दूध बेचकर 18 लाख रुपए बचाए। ये सारे पैसे उन्होंने गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय को दान कर दिए, ताकि गांव के बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो सके। कच्चे घर में रहने वाले माधु गांव के सरकारी स्कूल को 8 साल से दान दे रहे हैं। पहले उन्होंने अपने लिए पक्का घर बनाने का सोचा, लेकिन फिर इरादा बदल लिया। 8 साल पहले पत्नी के निधन के बाद उन्होंने स्कूल के बच्चों को ही अपना परिवार मान लिया। माधु हर हफ्ते दाे-तीन दिन एक-दाे घंटे के लिए स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों के बीच बैठकर स्थानीय वागड़ी भाषा में कहानियां सुनाते हैं। गिनती सिखाते हैं। बच्चों को अपने समय की पढ़ाई के बारे में बताते हैं कि जब वे पढ़ते थे तो स्कूलों की कैसी व्यवस्था थी। माधु ने 5 लाख रुपए देकर स्कूल में प्रार्थना हॉल बनवाया। स्कूल प्रशासन ने इसका नाम माधुर्य भवन रखा। उन्होंने ज्ञान पोर्टल के लिए भी 3 लाख रु. दिए। स्कूल को दान की परंपरा बनी माधु का दान पूरे गांव की प्रेरणा बन गया है। अब स्कूल को दान देने की गांव में परंपरा सी बन गई है। माधु के पड़ाेसी लक्ष्मण रेबारी ने स्कूल में जल मंदिर निर्माण के लिए 2 लाख रुपए दान दिए। डूंगरजी रेबारी ने किचन गार्डन के लिए जमीन दान कर दी। स्कूल के लिए हर घर से दान आता है। 1975 में बने इस स्कूल की जरूरतें गांव से ही पूरी की जाती हैं। यहां 82 विद्यार्थी पढ़ते हैं। संस्था प्रधान महेश व्यास ने बताया कि जब भी माधु, लक्ष्मण सहित गांव के किसी भी व्यक्ति से स्कूल के लिए मदद मांगी, उन्होंने कभी मना नहीं किया।


