राजसमंद में मेवाड़ के प्रसिद्ध धाम चारभुजा नाथ मंदिर में भक्तों ने भगवान के साथ जमकर लाग गुलाल खेला। यहां बुधवार को फागोत्सव का दूसरा दिन था। इस दौरान भक्तिरस और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान को सोने के झूले में विराजित किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। हर कोई सिंदूरी गुलाल में रंगा दिखा। ठाकुरजी के साथ जमकर गुलाल खेली गई। पूरा परिसर लाल रंग से रंग गया।
सोने के कलश में जल भरकर भगवान को किया अर्पण मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण फाग का आयोजन सुबह जल्दी सम्पन्न किया गया था। बुधवार को विधिवत परंपरानुसार कार्यक्रम हुए। सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ दिन की शुरुआत हुई। इसके बाद 8.30 बजे राज श्रृंगार दर्शन और दोपहर 12.30 बजे राजभोग आरती संपन्न हुई। दोपहर 2.30 बजे पुजारी भीम कुण्ड स्थित बावड़ी से सोने के कलश में जल भरकर लाए और प्रभु को अर्पित किया। इसके बाद लालजी गोपाल प्रभु को मंदिर से बाहर सोने के झूले में विराजित किया गया। तोप से सलामी दी गई और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच प्रभु का विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया गया। दर्शन खुलते ही श्रद्धालुओं ने भारी मात्रा में गुलाल उड़ाई। प्रभु के झूले के दोनों ओर पुजारी कतारबद्ध होकर होली के कीर्तन और हरजस गान करते रहे। शाम 4 बजे अमल का भोग लगाया गया। झूला दर्शन साढ़े 5 बजे तक चले, इसके बाद ठाकुरजी को पुनः गर्भगृह में पधराया गया। संध्या आरती के साथ कपाट बंद हुए। शाम को मंदिर परिक्रमा में पुजारी परिवार पारंपरिक वेशभूषा में गेर नृत्य करेंगे। यह आयोजन 18 मार्च तक जारी रहेगा। श्रीनाथजी मंदिर में मंगलवार को डोल उत्सव के साथ फागोत्सव का समापन पुष्टिमार्ग की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में मंगलवार को डोलोत्सव के साथ फागोत्सव का समापन हुआ। खग्रास चंद्रग्रहण के दौरान भी परंपरा अनुसार दर्शन खुले रहे। युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के सान्निध्य में गोदान सहित विविध दान-पुण्य के अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, परिक्रमा और दंडौत कर आस्था प्रकट की।


