रश्मि की उम्र सिर्फ 23 साल थी, जब उसने अपने से छह साल बड़े 29 साल के अभिनव से शादी की। दोनों की मुलाकात नौकरी के शुरुआती दिनों में ऑफिस की एक प्रेजेंटेशन के दौरान हुई थी। कॉफी ब्रेक में शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे लंच डेट्स और देर रात तक चलने वाली चैट्स में बदल गई। दो साल में दोस्ती ने प्रेम और फिर शादी का रूप ले लिया। शुरुआत में दोनों घंटों बात करते थे। रश्मि अपने सपनों और यात्राओं की लंबी सूची साझा करती, तो अभिनव भविष्य की योजनाएं बनाता। शादी के कुछ महीनों बाद दिनचर्या बदलने लगी। ऑफिस से लौटकर साथ चाय पीने की जगह दोनों अपने-अपने मोबाइल में खो जाते। डाइनिंग टेबल पर खाना ठंडा हो जाता, पर रील्स खत्म नहीं होतीं। धीरे-धीरे बातचीत कम होती गई और छोटी-छोटी बातों पर तकरार बढ़ने लगी। “तुम सुनते नहीं” और “तुम समझती नहीं” जैसे वाक्य रोजमर्रा का हिस्सा बन गए। हालात यहां तक पहुंच गए कि तलाक की चर्चा होने लगी। 3-4 घंटे का स्क्रीन टाइम ही दूरी की असली वजह काउंसलिंग के दौरान पता चला कि रोजाना तीन-चार घंटे का स्क्रीन टाइम ही दूरी की असली वजह था। तय समय में ही सोशल मीडिया इस्तेमाल करने और आपसी संवाद बढ़ाने के नियम के साथ रिश्ते में फिर से गर्माहट लौट आई और संबंध संभल गया। यह कहानी सिर्फ रश्मि और अभिनव की नहीं है, बल्कि काउंसलिंग के लिए पहुंचने वाले हर पांच में से दो दंपतियों की है। मोबाइल पर रील देखना और बनाना आज की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी बढ़ती लत अब परिवारों पर भारी पड़ने लगी है। कोरोना के बाद यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। पति-पत्नी के बीच संवाद घट रहा है और स्क्रीन टाइम बढ़ता जा रहा है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले दंपती विवादों और तनाव के मामलों में सोशल मीडिया, खासकर रील्स, एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है। साल 2024-26 में ऐसे 1250 मामले दर्ज होना चिंताजनक संकेत है। दोनों के बीच ज्यादातर विवाद सोशल मीडिया से जुड़े मनोचिकित्सकों के अनुसार, पांच दंपती विवाद मामलों में से दो सीधे तौर पर सोशल मीडिया से जुड़े होते हैं। पति-पत्नी के बीच झगड़े की वजह अक्सर यह होती है कि एक-दूसरे को समय देने के बजाय मोबाइल पर घंटों रील देखना या बनाना प्राथमिकता बन गया है। साल 2024-25 और 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में कुल 1250 दंपती विवाद के मामले दर्ज हुए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जहां सोशल मीडिया ने रिश्तों में दूरी बढ़ाई। घर के काम और कपल्स के बीच संवाद प्रभावित डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार, कई मामलों में देखा गया है कि महिलाएं या पुरुष रील बनाने और देखने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि घर के जरूरी काम और पारिवारिक जिम्मेदारियां प्रभावित होने लगती हैं। पति-पत्नी दोनों मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं, जिससे बच्चों को समय नहीं मिल पाता। पहले मोबाइल सीमित था, अब दिनचर्या का हिस्सा क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. राहुल शर्मा बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। पहले जहां मोबाइल का उपयोग सीमित था, वहीं अब यह दिनचर्या का प्रमुख हिस्सा बन गया है। औसतन शहरी कपल रोजना 3 से 5 घंटे मोबाइल पर बिताते हैं। इसमें रील्स और शॉर्ट वीडियो का समय सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया की तुलना, लाइक्स और कमेंट्स की चाह भी तनाव बढ़ाने में भूमिका निभाती है। कई बार एक साथी दूसरे की ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगता है। मोबाइल एडिक्शन और मनोवैज्ञानिक प्रभाव विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल एडिक्शन से ध्यान भंग, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और भावनात्मक दूरी बढ़ती है। जब व्यक्ति वर्चुअल दुनिया में ज्यादा समय बिताता है, तो वास्तविक रिश्तों में उसकी भागीदारी कम हो जाती है। इससे साथी को उपेक्षा का अहसास होता है, जो धीरे-धीरे विवाद का कारण बनता है। सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर तुलना की भावना भी तनाव बढ़ाती है। इससे असंतोष और असुरक्षा की भावना जन्म लेती है। काउंसलिंग प्रक्रिया से मिल रही मदद काउंसलिंग में पहले पति-पत्नी से अलग-अलग बातचीत कर समस्या को समझा जाता है। फिर संयुक्त सत्र में संवाद की कमी, गलतफहमियों और स्क्रीन टाइम की आदत पर चर्चा की जाती है। औसतन 4 से 6 सेशन में सुधार दिखने लगता है। गंभीर मामलों में तीन से चार महीने तक काउंसलिंग चलती है। जरूरत पड़ने पर व्यवहार थेरेपी और समय प्रबंधन तकनीक भी सिखाई जाती है। रिश्ते बचाने के 5 उपाय ये खबर भी पढ़ें… पति बोला- रील बनाने रोज शॉपिंग करती है पत्नी भोपाल के फैमिली कोर्ट ने 28 नवंबर को एक पति-पत्नी को आपसी रजामंदी से तलाक दे दिया। उनकी शादी 12 साल पहले हुई थी और दोनों का एक बेटा भी है। तलाक की वजह बनी सोशल मीडिया रील्स। पढ़ें पूरी खबर…


