सौम्य खंडेलवाल पहले, लवी पराशर दूसरे स्थान पर रहे:डीग के 5 स्टूडेंट्स का राज्य स्तरीय युवा संसद के लिए चयन

डीग में मा. आ. जी राजकीय महाविद्यालय में पहली बार जिला स्तरीय युवा संसद-2026 का आयोजन किया गया। प्रिंसिपल डॉ. दिलीप सिंह की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में 5 प्रतिभागियों को राज्य स्तरीय युवा संसद के लिए चुना गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयनित 5 प्रतिभागियों को अब राज्य स्तरीय युवा संसद में भाग लेने का अवसर मिलेगा। राज्य स्तर के विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री के समक्ष ‘विकसित भारत’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा।
घोषित परिणामों के अनुसार सौम्या खंडेलवाल ने प्रथम, लवी पराशर ने द्वितीय, पवित्रा ने तृतीय, यश जोशी ने चतुर्थ तथा घनश्याम ने पंचम स्थान प्राप्त किया। सभी विजेताओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। आपातकाल पर बहस की परंपरा से परिचित कराया
कार्यक्रम का मुख्य विषय “आपातकाल के 50 वर्ष : लोकतंत्र के लिए सबक” था। विद्यार्थियों ने इतिहास, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में गहन और तथ्यपरक विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों को संसदीय प्रक्रियाओं, बहस की परंपरा और नीति-निर्माण की बारीकियों से परिचित कराना था। प्रिंसिपल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती युवाओं की जागरूकता और भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने छात्रों से संवैधानिक मूल्यों के प्रति सजग रहने और रचनात्मक संवाद को अपनाने का आग्रह किया। महाविद्यालय विकास समिति के सदस्य जगदीश टक्सालिया और अनिल कुमार गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अतिथियों ने 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर बताया। उन्होंने कहा कि उस दौर से मिली सीख आज भी प्रासंगिक है और नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष में सशक्त तर्क प्रस्तुत किए। आपातकाल की पृष्ठभूमि, मौलिक अधिकारों पर प्रभाव, न्यायपालिका व मीडिया की भूमिका तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की उत्तरदायित्वपूर्ण भूमिका जैसे बिंदुओं पर विस्तृत विश्लेषण किया गया। मूल्यांकन विषय-वस्तु की समझ, तार्किक प्रस्तुति, अभिव्यक्ति कौशल, समय-प्रबंधन और मंच संचालन के आधार पर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन समन्वयक श्वेता के मार्गदर्शन में हुआ। निर्णायक मंडल में प्रो. योगेंद्र कुमार, डॉ. कौशल कुमार सैन, महेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. वी. डी. पाराशर और प्रो. सरोज देवी शामिल थे।

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