लोकायुक्त पुलिस की गिरफ्त में आए परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभशर्मा और उसके सहयोगी चेतन सिंह व शरद जायसवाल से पूछताछ में 50 से अधिक बेनामी प्रॉपर्टी का खुलासा हुआ है। इन संपत्तियों के नाम पर 30 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किया गया है, जिनसे जल्द पूछताछ होगी। छापेमारी के दौरान सौरभ के घर व ऑफिस से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले, जिनमें से अधिकतर उसके रिश्तेदारों व करीबियों के नाम पर थीं, लेकिन उनकी मूल रजिस्ट्रियां सौरभ के पास थीं। कई संपत्तियों की पॉवर ऑफ अटॉर्नी भी किसी और के नाम कराई गई थी। लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ से इन संपत्तियों को लेकर पूछताछ की, लेकिन उसने खुद के नाम न होने की बात कही। जांच में सहयोग न करने पर 30 लोगों को नोटिस भेजा है। 4 फरवरी को सौरभ की रिमांड खत्म होने पर लोकायुक्त फिर रिमांड की मांग कर सकती है, क्योंकि पूछताछ में वह सहयोग नहीं कर रहा है। सोने लदी कार किसकी… सौरभ और उसके सहयोगियों की संलिप्तता 52 किलो सोने और 11 करोड़ रुपए नकदी से लदी एक इनोवा कार में भी सामने आई है। चेतन सिंह ने बताया कि कार कागजों में उसके नाम थी, लेकिन इसका इस्तेमाल सौरभ और उसके लोग करते थे। कार की खरीदी में चेतन के डॉक्यूमेंट थे, लेकिन डाउन पेमेंट सौरभ ने चेक से दिया था। हर महीने की किस्त चेतन के बैंक खाते से कटती थी। सौरभ ने दावा किया कि यह कार चेतन की है और उसका इससे कोई संबंध नहीं है। प्यारे अब भी गिरफ्त से दूर : इन सबके बीच, कार का ड्राइवर प्यारे अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। चेतन के मुताबिक, प्यारे ही कार चलाता था, लेकिन 19 दिसंबर के बाद से उसका कोई पता नहीं है। जांच एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं। झूठा शपथ पत्र… सौरभ की मां पर भी दर्ज होगी FIR परिवहन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए सौरभ शर्मा और उसकी मां उमा शर्मा द्वारा दिए गए झूठे शपथ पत्रों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अब विभाग को छग सरकार के आधिकारिक जवाब का इंतजार है। जांच परिवहन विभाग की शिकायत शाखा को सौंपी गई थी। इसके बाद सौरभ और उमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है।


