राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और जैव विविधता के प्रतीक ‘ओरण’ व ‘गोचर’ भूमियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। गुरुवार को ‘ओरण बचाओ’ मुहिम के तहत प्रदेश भर में पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों द्वारा जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन दिए गए। इसी कड़ी में जैसलमेर में सुमेरपाल सिंह रामगढ़ के नेतृत्व में ओरण टीम के सदस्यों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन सौंपकर ऐतिहासिक ओरण भूमियों को तत्काल संरक्षित करने की मांग की। प्रदेशव्यापी अभियान: राजस्व रिकॉर्ड में इंद्राज की मुख्य मांग टीम ओरण के सदस्यों ने बताया कि राजस्थान के लगभग सभी जिलों में सदियों पुरानी ओरण और गोचर भूमियां स्थित हैं, जो जीव-जंतुओं, दुर्लभ वनस्पतियों और गौवंश के लिए जीवनरेखा हैं। सेटलमेंट के समय तकनीकी कारणों से कई ‘मुंहबोली’ ओरण भूमियां राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने से छूट गई थीं। अब इन भूमियों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देखते हुए पूरे प्रदेश में एक साथ आवाज उठाई गई है ताकि इन्हें सरकारी दस्तावेजों में विधिवत स्थान मिल सके। जैसलमेर में औद्योगिक आवंटन का विरोध ज्ञापन सौंपते समय सुमेर सिंह रामगढ़ ने स्थानीय मुद्दों पर जोर देते हुए कहा कि जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में ओरण और गोचर की जमीनें निजी कंपनियों को आवंटित की जा रही हैं। उन्होंने मांग की है कि: रामगढ़ क्षेत्र में डालमिया कंपनी को सीमेंट प्लांट के लिए आवंटित भूमि को निरस्त किया जाए। राघवा और सेऊवा क्षेत्र में सौर ऊर्जा पार्कों के लिए दी जा रही ओरण की जमीनों के आवंटन पर तुरंत रोक लगे। 725 किमी की पदयात्रा से संघर्ष को धार गौरतलब है कि ओरण संरक्षण के लिए तनोट माता मंदिर से जयपुर तक 725 किलोमीटर की पदयात्रा निकाली जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जैसलमेर, म्याजलार और तनोट क्षेत्र में लाखों गौवंश, राज्य पक्षी गोडावण और चिंकारा का वास है। यहाँ के प्राचीन कुएं, तालाब, खड़ीन और देवस्थल भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, जिससे इनके नष्ट होने का भय बना हुआ है। सरकार से राहत की उम्मीद प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि ‘सबका साथ-सबका विकास’ और विरासत संरक्षण के ध्येय वाली वर्तमान सरकार जनभावनाओं का सम्मान करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि प्रदेश की सभी ऐतिहासिक ओरण-गोचर भूमियों, बरसाती नदी-नालों और कैचमेंट एरिया को जल्द से जल्द राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर प्रदेशवासियों को राहत प्रदान की जाए।


