उर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मंगलवार को कोटा में अपने आवास पर पीडब्लूडी, समसा और प्रशासन से जुडे अधिकारियों की मीटिंग ली। मीटिंग मुख्य रूप से जर्जर स्कूलों के मरम्मत को लेकर ली गई थी। मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि आपदा राहत के तहत स्कूलों में रिपेयरिंग के लिए दो दो लाख रूपए आए हैं। पहले बारिश और कई पुराने स्कूल भवन होने की वजह से भवन जर्जर हो चुके है। कई स्कूलों में सीपेज की समस्या है। इनकी मरम्मत के लिए जो राशि आई है, उससे काम सही तरीके से और गुणवत्तापूर्ण हो, इसके लिए अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए गए है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि काम में किसी तरह की लापरवाही न हो, आगामी बारिश के सीजन में स्कूलों की छते न टपके, सीपेज की समस्या न हो। उन्होंने बताया कि कोटा जिले में करीब 1100 स्कूल है, लेकिन उनके भवनों में देखरेख का जिम्मा एक एईएन और दो जेईएन के भरोसे है। स्कूलों में जो काम हो उनकी मॉनीटरिंग ठीक तरह से होनी चाहिए लेकिन स्टाफ नहीं होने की वजह से उनकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। वहीं मॉनिटरिंग नहीं होने के चलते घटिया काम होते है, जिससे स्कूल के भवन जल्द जर्जर हो जाते हैं। कई सालों से ऐसा ही चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस बारे में मुख्य सचिव से भी चर्चा की है कि या तो कैडर बनाए जाए या फिर स्कूलों को समसा की जगह पीडब्लूडी को दे दिए जाए। ताकि इसकी सुव्यवस्थित तरीके से मॉनिटरिंग हो सके। स्कूलों में हमारे देश का भविष्य जाता है। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, ऐसे में इन हादसों से बच्चों और उनके घरवालों के मन में डर का माहौल रहता है। उसे दूर करना और सुरक्षा देना हमारा काम है।


