कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की ट्रेनिंग को भारत के स्कूलों में अनिवार्य करने की मांग तेज हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक ऐसा जीवनरक्षक कौशल है, जो हर नागरिक को सीखना चाहिए। आपातकालीन स्थितियों में समय पर दिया गया CPR मरीज के जीवित रहने की संभावना को दोगुना कर सकता है। सीनियर फिजिशियन, हार्ट एंड हेल्थ डॉ. वीके जैन ने बताया- दुनिया के कई देशों में स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बन चुकी CPR ट्रेनिंग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। नॉर्वे में जहां हर छात्र को यह प्रशिक्षण दिया जाता है, वहां कार्डियक अरेस्ट से बचने की दर 70% तक पहुंच गई है। अमेरिका के कई राज्यों में हाई स्कूल की डिग्री के लिए CPR ट्रेनिंग अनिवार्य है, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर हृदय गति रुकने की स्थिति में बचाव की संभावना दोगुनी हो गई है। जापान ने इस दिशा में और आगे कदम बढ़ाते हुए सभी सार्वजनिक स्थानों पर CPR ट्रेनिंग के साथ-साथ ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) की सुविधा भी उपलब्ध करा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि CPR सीखना न केवल आसान है बल्कि महज एक घंटे में इसे सीखा जा सकता है। यह कौशल दिल का दौरा, डूबने, दम घुटने या सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में जीवनरक्षक साबित हो सकता है। सिर्फ 60 मिनट की ट्रेनिंग से आप जान सकते हैं कि इमरजेंसी में कैसे रिएक्ट करना है। यह हाथों से किया जाने वाला एक सरल तरीका है, जिससे आप किसी की धड़कन दोबारा चला सकते हैं। एक बार सीख लिया, तो यह स्किल जीवनभर आपके दिमाग में रहती है। CPR सीखना उतना ही आसान है जितना साइकिल चलाना, और यह किसी की जिंदगी बचाने में आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। भारत के युवाओं पर असर अगर स्कूलों में CPR अनिवार्य हो, तो कितनी जिंदगियां बच सकती हैं? भारत के 50% से अधिक हार्ट अटैक के मामले अस्पताल पहुंचने से पहले ही जानलेवा साबित होते हैं। इसका कारण समय पर CPR न मिलना।” अगर हर स्कूल में CPR ट्रेनिंग अनिवार्य हो जाए, तो हर साल हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। स्कूली बच्चे अगर इसे सीख लें, तो वे अपने परिवार, दोस्तों और समाज में इमरजेंसी के समय मदद कर सकते हैं। युवाओं में यह आत्मविश्वास बढ़ाएगा कि वे किसी आपातकालीन स्थिति में घबराएंगे नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए तैयार रहेंगे। “अगर हर भारतीय युवा CPR सीखे, तो हमारा देश ज्यादा सुरक्षित और जिम्मेदार बन सकता है।” सरकार से अपील: सीनियर फिजिशियन डॉ. वीके जैन ने बताया- इसे स्कूल शिक्षा में जोड़ने से भारत में हेल्थ सेफ्टी का नया अध्याय शुरू होगा। आज स्कूलों में हमें गणित, विज्ञान और इतिहास पढ़ाया जाता है—लेकिन जीवन बचाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती।” अब समय आ गया है कि सरकार CPR को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करे। स्कूलों में CPR अनिवार्य करने से एक जागरूक और जिम्मेदार समाज बनेगा। हर छात्र अगर CPR सीख ले, तो भारत में हेल्थ सेफ्टी को एक नई दिशा मिल सकती है। हम सरकार से अपील करते हैं कि इसे शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया जाए, ताकि हर भारतीय नागरिक किसी की जिंदगी बचाने में सक्षम हो।


