स्कूल के शौचालय को सार्वजनिक बताकर ओडीएफ घोषित कराया गांव, मौका पर देखा तो लटका था ताला

सरकार ने खुले में मुक्त शौच को लेकर स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर से लेकर गांव तक में शौचालय बनवाने पर जोर दिया था। इस अभियान के तहत करोड़ों रुपए का बजट भी खर्च किया, लेकिन ओडीएफ घोषित हो चुके जघीना गांव में महिलाएं आज भी बाहर जाने को मजबूर हैं। वजह, सरपंच ने कागज में सरकारी स्कूल के शौचालय को सार्वजनिक शौचालय दिखा दिया। जबकि हकीकत में वह स्कूल के शौचालय हैं। कम्युनिटी टॉयलेट के नाम पर जो क्षेत्र में शौचालय भी बना है तो उसमें भी पानी तक की व्यवस्था नहीं कराई, जिस वजह से गांव की महिलाएं खुले में खेतों में जाने को मजबूर है। भरतपुर जिले के 1517 गांव में से 400 गांव को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। 2017 में जघीना गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया था। अब गांव को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। लेकिन इसके लिए ओडीएफ के मानक बनाए रखना जरूरी है। भास्कर ने पड़ताल की तो मामला कुछ और ही निकला, कागजों में ठाकुर देशराज पब्लिक स्कूल में सरपंच ने शौचालय पिंक टॉयलेट बनवाया गया था, लेकिन अधूरे पड़े शौचालय का फोटो खींचने के बाद से आज तक सरपंच ने उसमें पानी तक की व्यवस्था नहीं कराई। जिस वजह से स्कूल की लड़कियां शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पातीं। जबकि सरपंच ने उसे सार्वजनिक टॉयलेट के रूप में दिखाया। दूसरा ही मामला जो जौनारी पोखर स्कूल के पास का है। जहां सार्वजनिक शौचालय को कागज में दिखाए लेकिन हकीकत में शौचालय का इस्तेमाल गांव के लोगों ने किया ही नहीं है क्योंकि वहां पानी की व्यवस्था ही नहीं है। गौरतलब है कि तत्कालीन सरकार ने गांवों को ओडीएफ करने के लिए सर्वे कराए थे जिसके तहत टीमों ने जिले के कई गांवों में सर्वे किया और उन्हें स्वच्छता के मानदंड बताए इसी के आधार पर जिन गांवों को चिन्हित किया गया उनके लिए शौचालय निर्माण के लिए बजट भी घोषित किया गया और गांवों में सरकार द्वारा आधुनिक शौचालय बनवाए गए। भवनपुरा िस्थत राजकीय प्राथमिक विद्यालय में एक भी शौचालय नहीं है। स्कूल के बच्चे खेत में शौच के लिए जाते हैं, जो पहले शौचालय थे। वह खराब व टूटे डले हैं। सरपंच के सामने प्रस्ताव रखा है। जल्द बन जाएगा। स्कूल में 40 बच्चे व आंगनबाड़ी में 30 बच्चे हैं। -डॉ. मनोज कुमार, प्रधानाध्यापक ठाकुर देशराज स्कूल में सरपंच नरेंद्र सिंह ने सिर्फ एकि पिंक टॉयलेट बनवाया है। वह भी आज तक अधूरा है। शौचालय में पानी की व्यवस्था तक नहीं कराई। इसलिए शौचालय बदहाल हो चुका है। यह सार्वजनिक शौचालय नहीं है सिर्फ स्कूल की छात्राओं के लिए है। -देवेंद्र िसंह, प्रधानाध्यापक (ठाकुर देशराज स्कूल) जघीना जौनारी पोखर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में स्थित शौचालय स्कूल का है, गांव में सार्वजनिक शौचालय न होने के कारण ग्रामीण हमारे स्कूल में शौच के लिए चले जाते हैं। इस कारण शौचालय में ताला लगा कर रखना पड़ता है। स्कूल का मुख्य दरवाजा टूटा है। – अंकुर सिंह, प्रधानाध्यपक (राजकीय प्राथमिक विद्यालय) गांव में जौनारी पोखर स्कूल के पास, ठाकुर देशराज स्कूल, भवनपुरा स्कूल के अंदर सार्वजनिक शौचालय बने हैं। 30 से ज्यादा लोगों को शौचालय बनवाने के लिए पैसे दिए हैं। ओडीएफ घोषित हो चुके गांव में सभी के यहां शौचालय बने हुए हैं।— नरेंद्र सिंह, सरपंच

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