शहर के पास स्थित गांव बोजुंदा के स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने खेल मैदान की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पर करीब एक घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कई बच्चे स्कूल नहीं गए और अपने ग्रामीणों के साथ धरने में शामिल हुए। बच्चों का कहना था कि गांव में खेल मैदान नहीं होने के कारण उन्हें खेलने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल पाती। कलेक्ट्रेट परिसर में बच्चों की मौजूदगी ने सभी का ध्यान इस समस्या की ओर खींचा। बच्चों ने कलेक्ट्रेट में एकत्रित होकर लगातार नारेबाजी की और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की। अधिकारी को बाहर बुलाने की मांग धरना दे रहे ग्रामीणों को जब प्रशासन की ओर से प्रतिनिधि को बातचीत के लिए बुलाया गया, तो प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे तभी बात करेंगे जब अधिकारी खुद बाहर आकर उनकी समस्या सुनेंगे। प्रदर्शनकारियों की यह मांग पूरी नहीं हो पाई, क्योंकि अधिकारी बाहर नहीं आए। इसी वजह से धरना प्रदर्शन लंबा खिंच गया और कलेक्ट्रेट परिसर में माहौल कुछ समय तक तनावपूर्ण बना रहा। हालांकि प्रदर्शन के दौरान सिर्फ नारेबाजी हुई और किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। पुलिस और तहसीलदार ने बच्चों को समझाया स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरिता सिंह और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें समझाया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांग पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार जो संभव होगा, वह किया जाएगा। अधिकारियों के समझाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त किया और सभी लोग शांतिपूर्वक वहां से लौट गए। ग्रामीणों ने बताई अपनी समस्या बच्चों के साथ आए ग्रामीण संजय सेन ने बताया कि गांव के बच्चे लंबे समय से खेल मैदान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि खेल मैदान के अभाव में बच्चों और युवाओं को सड़कों या खाली लेकिन असुरक्षित जगहों पर खेलना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार गाड़ियां निकलने के दौरान बच्चों को चोट लगने की आशंका भी रहती है, जिससे अभिभावक हमेशा चिंतित रहते हैं। खेल मैदान से बच्चों में होगा खेल भावना का विकास ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में खेल मैदान होगा तो बच्चों और युवाओं में खेल भावना का विकास होगा। नियमित खेल से उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। साथ ही गांव के युवा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहेंगे और अपना समय सकारात्मक गतिविधियों में लगाएंगे। इसी कारण सभी ग्रामीणों ने एकमत होकर नए खेल मैदान के लिए जमीन अलॉट करने की मांग की है। सहनवा गांव में है खेल मैदान, बच्चे वहां खेल सकते है प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर ग्रामीण खेल मैदान की मांग कर रहे हैं, वहां जमीन अलॉट करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी बताया कि पास के सहनवा गांव में पहले से एक अच्छा खेल मैदान मौजूद है, जहां बोजुंदा गांव के बच्चे जाकर खेल सकते हैं। दोनों गांवों की दूरी भी ज्यादा नहीं है। अधिकारियों के इस बयान से ग्रामीण पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में उनकी समस्या का स्थायी समाधान जरूर निकलेगा।


