स्कोडा इंडिया ने तकनीकी खराबी के कारण अपनी 25,772 गाड़ियों को वापस बुलाया है। कंपनी के इस रिकॉल में 24 मई 2024 से 1 अप्रैल 2025 के बीच बनाए गए स्लाविया, कुशाक और कायलाक के मॉडल शामिल हैं। कंपनी ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) को बताया कि रिकॉल की गई गाड़ियों में पीछे वाली सीट बेल्ट में खराबी की समस्या की पहचान की गई है। रियर सीट बेल्ट की बकल लैच प्लेट टूटने की आशंका रिकॉल डॉक्युमेंट्स में स्कोडा ने बताया गया कि, कार को सामने से टक्कर लगने पर रियर सीट बेल्ट की बकल लैच प्लेट टूट सकती है। ऐसे में पीछे के सेंटर सीट बेल्ट असेंबली की वेबिंग से पीछे की दाहिनी सीट बेल्ट का बकल निकल सकता है। इससे यात्रियों को चोट लगने का खतरा बड़ जाएगा। कस्टमर से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज कंपनी ने बताया कि स्कोडा इंडिया के ऑफिशियल वर्कशॉप इन मॉडल्स के ऑनर्स से संपर्क करेंगे, जहां डिफेक्ट को सही किया जाएगा। वाहन मालिकों को खराब पार्ट को बदलने की जानकारी दे दी जाएगी। डिफेक्ट सुधारने या पार्ट्स बदलने के लिए कस्टमर से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। देश में गाड़ी रिकॉल के बड़े मामले रिकॉल क्या है और क्यों होता है? जब कोई कंपनी अपने बेचे गए प्रोडक्ट को वापस मंगाती है, तो इसे रिकॉल कहते हैं। किसी कंपनी के द्वारा रिकॉल का फैसला उस वक्त लिया जाता है जब उसके प्रोडक्ट में कोई खराबी होती है। रिकॉल की प्रोसेस के दौरान वो प्रोडक्ट की खराबी को दुरुस्त करना चाहती है। ताकि भविष्य में प्रोडक्ट को लेकर ग्राहक को किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। कंपनी के रिकॉल पर एक्सपर्ट की सलाह कार में खराबी को लेकर कंपनी को पहले सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) को एक डेटा देना पड़ता है। इसमें कार की खराबी के साथ कितने प्रतिशत लोगों को प्रॉब्लम हो रही है, बताना पड़ता है। इसके बाद सियाम अप्रूवल देता है। कंपनी खराबी को ठीक करने के लिए एक टाइम तय करती है। यदि किसी ग्राहक की गाड़ी उसके खरीदे गए शहर से बाहर है, तब वो उस शहर के नजदीकी सर्विस सेंटर पर भी उसे ठीक करा सकता है।


