भास्कर न्यूज| धमतरी
महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह ठाकुर की उपस्थिति में हुई, जिसमें यूनिसेफ के अधिकारियों की उपस्थिति रही। सीईओ ने स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम को निर्देशित किया कि सैम (सर्विस एक्यूट मालन्यूट्रीशन) गंभीर कुपोषित एवं मैम (मॉडरेटर एक्यूट मालन्यूट्रीशन) मध्यम कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग के बाद तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाए। आरबीएसके टीम द्वारा चिन्हित एनीमिक बच्चों का नियमित फॉलोअप किया जाए तथा सुपरवाइजर की उपस्थिति में दवा सेवन कराया जाए। जिपं सीईओ ने कहा कि स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की संख्या में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि जिले में वर्तमान कुपोषण दर 8.23 प्रतिशत है। सीईओ ने बैठक में सभी सीडीपीओ एवं विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकासखंड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समन्वय बैठक आयोजित कर संयुक्त कार्ययोजना तैयार करें तथा नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से कुपोषण उन्मूलन की दिशा में प्रभावी पहल करें। बैठक में जगरानी एक्का जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास, महेश मरकाम जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, समस्त परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। यूनिसेफ की प्रभारी अधिकारी नमिता पांडेय ने जीवन चक्र आधारित समेकित पोषण रणनीति की जानकारी देते हुए बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन संयुक्त रूप से गृह भेंट कर हितग्राहियों को परामर्श दें। उन्होंने किशोर बालिकाओं में एनीमिया की पहचान, विवाहित दंपत्तियों का सूचीकरण, सुरक्षित मातृत्व, हाइरिस्क गर्भावस्था की पहचान, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान, प्रसव पश्चात मातृ देखभाल, 6 माह तक अनन्य स्तनपान, 6 माह से तीन वर्ष तक पूरक आहार की नियमित निगरानी तथा 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा एवं विकासात्मक गतिविधियों पर संयुक्त रूप से कार्य करने पर जोर दिया।


