होली का उल्लास बीत चुका है, लेकिन अब रंग छुड़ाने के लिए ‘रील’ का इस्तेमाल लोगों को डॉक्टर्स के पास पहुंचा रहा है। इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर ‘इंस्टेंट रंग हटाने’ के दावों वाले वीडियो को देखकर इनके नुस्खों को अपनाकर लोग त्वचा को गंभीर रूप से झुलसा रहे हैं। अस्पतालों के आंकड़ों की बात करें तो होली बाद एसएमएस समेत निजी अस्पतालों की डर्मेटोलॉजी ओपीडी में 50 प्रतिशत तक केस इसी कारण से आ रहे हैं। एसएमएस के स्किन विभाग के एचओडी डॉ. दीपक माथुर बताते हैं कि पिछले दो दिनों में ऐसे केस बढ़े हैं। दो दिन में इस तरह के 250 से अधिक केस ओपीडी में आ चुके हैं। वहीं सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अतुल जैन ने बताया कि इन गलत तरीकों से कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, स्किन पीलिंग (खाल उतरना), परमानेंट स्कारिंग (स्थायी निशान) और हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रील पर दिखाए जा रहे हैं ऐसे नुस्खे डिटर्जेंट और ब्लीच का मिश्रण: कई लोग कपड़े धोने के पाउडर या ब्लीच को त्वचा पर रगड़ने की सलाह दे रहे हैं। यह त्वचा के प्राकृतिक पीएच (pH) संतुलन को बिगाड़कर उसे पूरी तरह रूखा कर देता है। पेट्रोल या केरोसिन का उपयोग
जिद्दी पेंट वाले रंगों को हटाने के लिए लोग मिट्टी के तेल या पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह न केवल त्वचा को जला सकता है, बल्कि शरीर में विषाक्तता (Toxicity) भी पैदा कर सकता है। नींबू और सोडे का अत्यधिक रगड़
नींबू का एसिड और बेकिंग सोडा मिलकर एक रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं जो संवेदनशील त्वचा पर ‘केमिकल बर्न’ का कारण बनती है। केस 1; रील देखकर लगाया लेप, चेहरा झुलसा
22 वर्षीय छात्रा रितिका ने एक रील देखकर अपने चेहरे का पक्का गुलाबी रंग हटाने के लिए सफेद टूथपेस्ट और बेकिंग सोडा का लेप लगा लिया। 5 मिनट बाद ही उसे तेज जलन महसूस हुई। जब उसने चेहरा धोया, तो रंग तो नहीं हटा, लेकिन गालों पर लाल चकत्ते पड़ गए और त्वचा झुलस गई। अब वह ‘केमिकल बर्न’ का इलाज करा रही हैं। केस 2; रंग हटाने की कोशिश, हाथों की त्वचा उतरी
आईटी प्रोफेशनल 28 वर्षीय अमित के हाथों पर गहरा हरा रंग चढ़ा था। एक दोस्त की सलाह पर उसने नेल पेंट रिमूवर (एसिटोन) से हाथ साफ किए। परिणामस्वरुप, उसकी त्वचा की ऊपरी परत पूरी तरह निकल गई और वहां गहरे घाव हो गए। डॉक्टर का कहना है कि त्वचा को सामान्य होने में महीनों लगेंगे। ठंडे पानी, माइल्ड क्लींजर और नारियल तेल का उपयोग करें। यदि रंग न निकले, तो उसे समय दें; त्वचा की कोशिकाएं अपने आप रंग छोड़ देंगी। -दीपक माथुर, SMS मेडिकल कॉलेज से सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट


