स्टाम्प पेपर बिक्री से सरकार की कमाई बढ़ी:5 साल में डबल हुई; इस बार अब तक 10 हजार 663 करोड़ रुपए से ज्यादा का रेवेन्यू मिला

स्टाम्प पेपर की बिक्री से राजस्थान में सरकार की अच्छी कमाई हो रही है। पिछले 5 साल में स्टाम्प पेपर की बिक्री और रजिस्ट्री (रजिस्ट्रेशन) की फीस से सरकार को मिलने वाली इनकम दोगुनी से ज्यादा हो गई है। इसके पीछे कारण डीएलसी दरों में बढ़ोतरी और स्टांप पेपर पर लगाई 30 फीसदी ड्यूटी है। मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग की एक रिपोर्ट देखें तो राज्य सरकार को स्टाम्प पेपर की बिक्री और अचल सम्पत्तियों के खरीद-बेचान डॉक्युमेंट के रजिस्ट्रेशन से अब तक (1 अप्रैल 2025 से 18 फरवरी 2026 तक) करीब 10,663 करोड़ रुपए से ज्यादा का रेवेन्यू मिल चुका है। ये रेवेन्यू सरकार को गत वित्तवर्ष 2024-25 (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक) के कुल रेवेन्यू से 121 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इसे देखते हुए सरकार ने अब रेवेन्यू के अपने इस टारगेट को भी बढ़ाकर 15 हजार करोड़ रुपए तक कर दिया है। इसलिए बढ़ रहा है रेवेन्यू विशेषज्ञों के मुताबिक जयपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में भजनलाल सरकार ने सत्ता में आने के बाद डीएलसी दरों में बढ़ोतरी की है। ये बढ़ोतरी 25 फीसदी से 35 फीसदी तक की है। कोविड शुरू होन के बाद से दिसंबर 2023 डीएलसी दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण स्टाम्प ड्यूटी पर 30 फीसदी का सरचार्ज लगाना और बाजार से लगभग 10 रुपए के स्टाम्प की बिक्री को अघोषित तौर पर बंद करना है। अब किसी भी छोटे से छोटे शपथ पत्र के लिए न्यूनतम तापमान 50 रुपए कीमत का स्टांप देना पड़ता है, जो बाजार में 30 फीसदी सरचार्ज के बाद 65 रुपए का मिलता है। अचल सम्पत्तियों की खरीद बढ़ी कोविड आने और उसके बाद कुछ समय तक अचल सम्पत्तियों (आवासीय, वाणिज्यिक और कृषि उपयोग) की खरीद में गिरावट हुई थी। लेकिन 2022 के बाद से वापस लोगों को रूझान अचल सम्पत्तियों की खरीद-बेचान में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा सरकार की एजेंसियों (विकास प्राधिकरण, यूआईटी, हाउसिंग बोर्ड) की कई योजनाओं भी बाजार में लांच होने से लोगों का रूझान इसमें बढ़ा है। इस साल ऐसे बढ़ी सरकार की आय पिछले 5 साल का रेवेन्यू

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