स्टॉक में कमी दिखाकर जनता के हिस्से का राशन गबन करने का आरोप


राशन की गड़बड़ी छुपाने और चावल चोरी का नाटक पकड़ा गया, भालूमाडा थाने में दर्ज हुआ मामला

स्टॉक में कमी दिखाकर जनता के हिस्से का राशन गबन करने का आरोप

 
कोतमा। जिले के कोतमा क्षेत्र की शासकीय उचित मूल्य दुकान में भ्रष्टाचार की परतें खुलते ही शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कोटेदार द्वारा गरीबों का राशन गटकने और फर्जीवाड़े की पटकथा रचने का मामला सामने आया है। खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह कोई सामान्य अनियमितता नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किया गया सरकारी अनाज की खुली लूट है। इस गड़बड़ी से सरकार को 5.87 लाख रुपये की आर्थिक क्षति और हजारों गरीब हितग्राहियों को उनके हक के राशन से वंचित होना पड़ा।


स्टॉक में भारी कमी, पीओएस से फर्जी एंट्री


05 मई 2025 को की गई संयुक्त जांच में विक्रेता के खिलाफ कई संगीन अनियमितताएं सामने आईं। जांच के अनुसार 112.07 क्विंटल चावल और 49.03 क्विंटल गेहूं स्टॉक से कम मिला, जिसकी कुल लागत 5,87,155.72 रुपये आंकी गई। यह खाद्यान्न सरकारी गोदाम से ट्रक द्वारा दुकान तक आया था, लेकिन विक्रेता ने न तो इसे समय पर रिसीव किया और न ही इसका वितरण किया।विक्रेता ने पीओएस मशीन से उपभोक्ताओं के अंगूठे लगवाकर उन्हें राशन नहीं दिया, बल्कि सिर्फ कागज पर मात्रा लिख कर रख ली जाती थी। हितग्राहियों को पावती तक नहीं दी जाती थी। जांच में यह भी पाया गया कि विक्रेता महीने में मात्र 3-4 दिन दुकान खोलता था, बाकी समय दुकान बंद रहती थी। हितग्राहियों को सूचना तक नहीं दी जाती थी। लोगों को पिछले महीने का राशन देने से मना कर दिया जाता था और कहा जाता था कि श्राशन लैप्स हो गयाश्। जब कि वितरण की एंट्री पहले ही की जा चुकी होती थी। विक्रेता द्वारा स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, निरीक्षण पंजी तक प्रस्तुत नहीं किया गया। दुकान में भाव सूची व स्टॉक सूची भी प्रदर्शित नहीं की गई, और इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र भी नदारद था।


ग्रामीणों ने खोला पोल, हेल्पलाइन में की थी शिकायतें


ग्रामवासियों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने स्पष्ट रूप से बताया कि कोटेदार अनाज नहीं देता, फिंगर लगवाकर राशन की कालाबाजारी करता है। हितग्राही राजेश शुक्ला और कमलेश केवट ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिनके क्रमांक 32061489 और 32004548 हैं। जांच में इन शिकायतों को पूर्णतः सत्य पाया गया। 03 मई को गोदाम से आए चावल की खेप का ऑनलाइन रिसीविंग नहीं की गई थी, लेकिन वह फिजिकली दुकान में मौजूद मिला, जो कि गबन के इरादे का स्पष्ट संकेत है। सुरेन्द्र पाण्डेय ने थाने को सूचना दी थी कि दुकान में चोरी हुई है, लेकिन जांच में वह कहानी भी झूठी पाई गई। दुकान का ताला भी प्रशासन की मौजूदगी में खुद तुड़वाया गया।


एफआईआर हुआ दर्ज


कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अलका पटेल द्वारा थाना भालूमाड़ा में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 318(4), 316(2), 316(5) बीएनएस एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 3/5 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। उल्लेखनीय है कि महीनों से अनाज का गबन चल रहा था, लेकिन विभागीय निगरानी शिथिल रही। जांच में सामने आया है कि जनवरी से लेकर मई तक लगातार गड़बड़ियां होती रहीं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है।


शासन और जनता को लगाया लाखों का चूना


देवगवां शासकीय उचित मूल्य दुकान (दुकान कोड 4803020) से जुड़ा एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस चावल चोरी की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, वह दरअसल एक पूर्व नियोजित धोखाधड़ी निकली। जांच में सामने आया है कि दुकान के सेल्समैन और संस्था प्रबंधक लगातार आठ महीनों से स्टॉक में कमी छुपाकर, शासन से अतिरिक्त खाद्यान्न की माँग करता रहा और हर माह उपभोक्ताओं को एक महीने बाद का राशन वितरित कर रहा था। जानकारी के अनुसार, दुकान में लगभग 110 क्विंटल गेहूं और चावल पहले से कम था। हर महीने नियमित एलॉटमेंट आने से पहले ही खाद्य विभाग से शॉर्ट स्टॉक दिखाकर अतिरिक्त एलॉटमेंट लेता था। अप्रैल महीने का राशन मई में बांटा जाता और इसी तरह हर माह विलंब से वितरण की झूठी व्यवस्था चलती रही। इस बार जब मई के लिए आए चावल की 18.17 क्विंटल मात्रा को भी उसने ऑनलाइन रिसीव नहीं किया और फिर ताले तोड़ चोरी की कहानी गढ़ दी, तो जांच के दौरान पूरा खेल सामने आ गया। ग्रामीणों का आरोप है कि  दुकान महीने में केवल तीन चार दिन ही खोलता था। लाभार्थियों से पीओएस मशीन पर अंगूठा लगवाकर खुद पावती रख लेता, उन्हें कोई पर्ची नहीं दी जाती थी। कई बार राशन देने की बजाय बहाने बनाकर राशन लैप्स हो गया कह देता था। वहीं, स्कूलों और समूहों को मिलने वाला एमडीएम व सांझा चूल्हा योजना का राशन भी समय पर नहीं दिया गया।

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