पटना हाईकोर्ट ने पक्ष और विपक्ष के 42 विधायकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। इन 42 विधायकों में विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, विधायक चेतन आनंद और गोह से राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद के नाम शामिल हैं। इन विधायकों पर चुनाव के दौरान वोट चोरी करने और नॉमिनेशन के दौरान चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों ने जीते हुए विधायकों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में कथित गलत जानकारी देने और चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को लेकर उनसे जवाब मांगा है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित विधायकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने क्या आरोप लगाए जानकारी के अनुसार, संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव हारने वाले प्रत्याशियों ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई और नामांकन के समय दाखिल किए गए शपथपत्र में तथ्यों को छुपाया गया या गलत जानकारी दी गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत में याचिकाएं दाखिल की गईं। जिसके बाद गुरुवार को इन याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भी संबंधित विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अब अदालत में दाखिल किए जाने वाले जवाब, साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे की सुनवाई होगी। कोर्ट के नोटिस पर क्या बोले विधायक हाईकोर्ट के नोटिस के बाद कई विधायक मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। अधिकांश विधायकों ने कहा कि वे अपना जवाब अदालत में ही देंगे। जीवेश मिश्रा ने कहा, “हाईकोर्ट का जवाब हमलोग हाईकोर्ट में ही देंगे।” अभिषेक रंजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर किसी को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है तो कोर्ट जाना उसका अधिकार है। अब क्या निर्णय होगा, यह अदालत तय करेगी।” वहीं भाई वीरेंद्र ने कहा, “कोर्ट की शरण लेना सबका अधिकार है और निर्णय लेना कोर्ट का अधिकार है।” बीजेपी विधायक नीरज सिंह बबलू ने कहा, “यह कानूनी मामला है। सभी लोग अपना-अपना जवाब अदालत में देंगे।” इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राजू तिवारी ने कहा, “यह न्यायपालिका का मामला है। इस पर क्या बोला जा सकता है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है।”


