अंतरिक्ष मौसम अब एक गंभीर विषय बन चुका है, क्योंकि यह न केवल पृथ्वी को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरिक्ष में स्थापित अनेक वेधशालाओं और उपग्रहों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सूर्य की गतिविधियों पर नजर रखकर अब पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों को संभावित खतरों से पहले ही सतर्क किया जा सकेगा। यह बात आज उदयपुर में इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. ए.एस. किरण कुमार ने कही। वे उदयपुर की सौर वेधशाला के 50 साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंती उत्सव पर आयोजित यहां थर्ड स्पेस में आयोजित अंतरर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ‘अंतरिक्ष मौसम (Space Weather)’ भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक क्षेत्र बनने जा रहा है, जिससे उपग्रहों, अंतरिक्ष मिशनों और पृथ्वी की संचार प्रणालियों की सुरक्षा संभव होगी। वैज्ञानिक को संबोधित करते हुए डॉ. किरण कुमार ने कहा कि मानव सभ्यता सदियों से सूर्य का अध्ययन कर रही है, लेकिन आज, जब हमारे पास अत्यधिक सक्षम कंप्यूटिंग सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तकनीकें हैं, तो लंबे समय से संचित डेटा को न केवल नए तरीकों से विश्लेषित करने की आवश्यकता है, बल्कि इसका उपयोग मानवता को संभावित खतरों से बचाने के लिए भी किया जाना चाहिए। जिससे सूर्य से मिलने वाले आंकड़ों का उपयोग अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सूर्य पर होने वाली गतिविधियां सीधे तौर पर पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड, सैटेलाइट सिस्टम, जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क और अंतरिक्ष यानों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में स्पेस वेदर की सटीक भविष्यवाणी भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। आदित्य मिशन का जिक्र भी किया
डॉ. किरण कुमार ने इसरो के आदित्य-एल 1 मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि इसके माध्यम से पहली बार सूर्य के फोटोस्फीयर के बेहद करीब से अवलोकन संभव हो पाया है। इससे वैज्ञानिकों को सूर्य की सतह और ऊर्जा उत्सर्जन को समझने की नई क्षमता मिली है। उन्होंने कहा कि इस मिशन से प्राप्त डेटा आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी के लिए एक मजबूत आधार बनेगा। निवृत्ति कुमारी मेवाड़ भी शामिल हुई
उद्घाटन सत्र में निवृत्ति कुमारी मेवाड़ और और अनिल भारद्वाज ने भी अपनी बात रखी। भुवन जोशी ने स्लाईड के जरिए उदयपुर सोर वेधशाला के ऐतिहासिक तब से अब तक के सफर के बारे में बताया। उदयपुर सौर वेधशाला विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बन गया ‘एक्सप्लोरिंग द सन एट हाई-रिजोल्यूशन: प्रेजेंट पर्सपेक्टिव्स एंड फ्यूचर होराइजन्स’ पर शुरू हुए अंतरर्राष्ट्रीय सम्मेलन में संस्थान के निदेशक शिबू मैथ्यू ने बताया कि उदयपुर सौर वेधशाला आज सौर भौतिकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विशेषज्ञों को उन्नत दूरबीनों और मिशनों से प्राप्त सौर वायुमंडलीय घटनाओं के निष्कर्षों को साझा करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा। मैथ्यू के अनुसार, यह वर्ष दोहरा महत्व रखता है, क्योंकि यह भारत की सबसे उन्नत सौर अवलोकन सुविधा ‘मास्ट’ (MAST) की 10वीं वर्षगांठ भी है। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत और विदेशों से करीब 100 प्रतिष्ठित सौर भौतिकविद यहां आए है।


