बस्तर में अब हिंसा की नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता की कहानी लिखी जा रही है। नक्सल हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे युवाओं को सरकार अब तकनीक और रोजगार से जोड़ रही है। हथियार छोड़कर आए नक्सलियों को अब सरकार ने स्मार्ट फोन दिया है। स्मार्ट फोन चलाकर ये सरेंडर्ड नक्सली स्मार्ट बनेंगे। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फूड एंड बेवरेज का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त बीजापुर जिले के 30 पुनर्वासित युवाओं को टूलकिट और स्मार्ट फोन दिया है। साथ ही सभी युवाओं को पासिंग आउट सर्टिफिकेट भी दिए गए। स्मार्ट फोन से जुड़ेंगे रोजगार और दुनिया से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, स्मार्ट फोन आज के समय में केवल संपर्क का साधन नहीं, बल्कि सीखने, कमाने और आगे बढ़ने का जरिया है। सरकार का उद्देश्य इन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की सकारात्मक धारा से जोड़ना है। होम स्टे योजना से गांव में ही मिलेगा काम राज्य सरकार ने होम स्टे योजना शुरू की है। इसके तहत ग्रामीण परिवार खेती-किसानी के साथ-साथ एक कमरा तैयार कर पर्यटकों के लिए होम स्टे चला सकते हैं। होटल मैनेजमेंट प्रशिक्षण प्राप्त ये युवा होम स्टे संचालन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। गांव में ही रोजगार पा सकते हैं। भटके युवाओं को सही राह दिखाने की अपील उप मुख्यमंत्री ने पुनर्वासित युवाओं से अपील की है कि, वे गांव लौटकर शांतिपूर्ण जीवन जिएं और उन युवाओं को भी समझाएं, जो अब भी भटकाव की राह पर हैं। 343 पुनर्वासित युवाओं को मिल चुका है प्रशिक्षण बस्तर जिले में अब तक 343 पुनर्वासित युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, राजमिस्त्री, बकरीपालन, मुर्गीपालन, हॉस्पिटैलिटी जैसे ट्रेड 161 युवाओं को नुवा बाट आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में विशेष प्रशिक्षण,
28 युवा वर्तमान में वेल्डिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं।


