स्वच्छ भारत मिशन शहर के लिए राजस्थान सरकार द्वारा नियुक्त स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर केके गुप्ता ने कहा- शौचालयों की सफाई का टेस्ट करना हो तो अपने घर से करो, माताएं बहनें सुरक्षित वहां से वापस आ जाए तो समझो साफ़ हैं। कई स्थानों पर शौचालयों की स्थिति इतनी बुरी है कि वहां 5 मिनट कोई रुक जाए तो बेहोश हो जाए। उन्होंने कहा एक बात याद रखना टॉयलेट निकायों के मंदिर होते हैं। मैंने तो ट्राइबल एरिया के शौचालयों में AC लगवा दिए थे। स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर केके गुप्ता गुरुवार को नागौर जिले के दौरे पर रहे। केके गुप्ता ने नागौर नगर परिषद सभागार में जिले के समस्त शहरी निकायों, जल जीवन मिशन और सीवरेज प्रोजेक्ट से संबंधित अधिकारियों बैठक ली। बैठक में गुप्ता ने सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व्यवस्था पर अधिकारियों से बात करते हुए कहा- इनकी सफाई ऐसी होनी चाहिए कि आपके घर की महिलाएं और सदस्य बिना किसी हिचकिचाहट के इनका उपयोग कर सकें। बोले-स्वच्छता टेस्ट करना है तो घर से करें गुप्ता ने कहा- आज हमारे नागौर के समुदायिक शौचालय जिस तरह से खराब हैं, मुझे बताने की आवश्यकता नहीं है। टॉयलेट ऐसे होने चाहिए कि माताएं-बहनें उसका उपयोग कर सकें। आपको टेस्ट करना है तो अपने घर से करें। अगर घर की महिलाएं सुरक्षित जाकर आ गई, इसका मतलब आपके टॉयलेट साफ है। अभी टॉयलेट की स्थिति ये है कि कोई 5 मिनट जाकर आ जाए तो बेहोश होकर पड़ (गिर) जाए। कौन साफ करेगा इसको बताओ, पब्लिक साफ़ करेगी या जिसकी जिम्मेदारी है वो साफ करेगा। इसका भी हम पैसा दे रहे हैं। मैंने शौचालयों में एसी लगवाए गुप्ता ने कहा- मैं आपको मेरे प्रोजेक्ट की बात बताता हूं, टॉयलेट निकायों के मंदिर होते हैं, इस बात को गंभीरता से सोचना विचार करना। मैंने हमारे यहां शौचालयों में एसी लगवाए। लोगों ने कहा- शौचालयों में एसी मैंने कहा- हां। आपसे पैसा लिया है क्या? आपसे जिस दिन पैसे लेने आएं आप तब जवाब दीजिएगा। आप अपना काम करिए, हम अपना काम कर रहे हैं। लोग बहाना बना कर ठंडी हवा खाते हैं ट्राइबल बेल्ट में शौचालय में एसी लगे हो, सोचिए। आज भी वहां लोग बाथरूम का बहाना बना कर ठंडी हवा खाते हैं। गर्मी होती है तो 5 मिनट ज्यादा लग जाएं तो क्या है। गुप्ता ने कहा- आप घर में अपने चप्पल-जूते पहन कर टॉयलेट में जाते हो क्या? हमने नवाचार किया। टॉयलेट में अलग से चप्पल देनी शुरू की। इसके बाद लोगों ने इसकी सराहना की। हमने एक और चीज शुरू की। हमने ट्राइबल बेल्ट में शौचालयों में 3 बटन लगा दिए। अच्छा, बुरा और सबसे गन्दा। अगर किसी ने सबसे गंदा का बटन दबाया तो कर्मचारी के 50 रुपए काटते थे। बुरा दबाया तो 25 रुपए और अच्छा दबाया तो फिर बात ही क्या?


