स्वच्छता सर्वेक्षण:सरकारी संस्थानों में पान-गुटखा के दाग-धब्बे मिले तो कट जाएंगे नंबर, खराब होगी रैंकिंग

छत्तीसगढ़ के शहरों के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 इस बार और सख्त होगा। स्वच्छता सर्वेक्षण के मापदंड इस बार और ज्यादा कड़े कर दिए गए हैं। सर्वे की नई टूलकिट के अनुसार पान-गुटखा के लाल धब्बे (रेड स्पॉट) और खुले में पेशाब से बने पीले निशान (येलो स्पॉट)शहर की रैंकिंग गिराएंगे। एक भी लापरवाही सामने आने पर 150 अंकों तक की कटौती होगी। इसलिए इस बार अच्छी रैंकिंग लाना कठिन टॉस्क होगा। हालांकि पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ के कई शहरों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। सात नगरीय निकायों को अलग-अलग श्रेणी में पुरस्कार मिला था। 20,000 से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नगर पंचायत बिल्हा को भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया। रायपुर को प्रोमिसिंग क्लीन सिटी का अवार्ड भी मिला था। इसलिए इस बार रायपुर नगर निगम समेत प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को सर्वेक्षण के नए टूल किट के अनुसार तैयारियां पूरी करनी होगी। स्वच्छता सर्वे 2025-26 में कुल अंक 12,500 कर दिए गए हैं। इनमें से 10,500 अंक ग्राउंड निरीक्षण पर आधारित होंगे। यानी अब फाइलों और रिपोर्ट से नहीं, बल्कि सड़कों, दीवारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार और कॉलोनियों में दिखने वाली सफाई से रैंकिंग तय होगी। छत्तीसगढ़ के कई शहरी इलाकों में दीवारों पर पान-गुटखा के दाग और खुले में यूरिन की समस्या पहले से मौजूद है। नई व्यवस्था में रेड स्पॉट और येलो स्पॉट के लिए अलग-अलग 75 अंक तय किए गए हैं। यदि शहर इन्हें पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए, तो सीधे अंक कटेंगे और राष्ट्रीय रैंकिंग नीचे जाएगी। केंद्र से आने वाली सर्वेक्षण टीम बिना पूर्व सूचना शहरों में पहुंचेगी। रायपुर पर रहेगी नजर
पिछले स्वच्छता सर्वे में राजधानी रायपुर को प्रोमिसिंग शहरों का अवार्ड मिला था। यानी ऐसे शहर जो स्वच्छता में लगातार अच्छे प्रयास कर रहे हैं उन्हें स्वच्छता रैंकिंग में देश में चौथा स्थान मिला था। हालांकि रायपुर के लिए पिछली बार राह आसान हो गई थी, क्योंकि लगातार तीन साल टॉप थ्री में आने वाले शहरों को अलग कर उनके लिए अलग श्रेणी तय कर ली गई थी। इस वजह से रायपुर को चौथा स्थान हासिल करने में सफलता मिली थी। साथ ही रायपुर को पहली बार गार्बेज फ्री सिटी में 7 स्टार रेटिंग मिली थी। यह बड़ी उपलब्धि थी। इन बिंदुओं पर मिलेंगे 10,500 अंक
विजिबल क्लीनलीनेस- 1500 {कचरा पृथक्करण व संग्रह- 1000 {सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट- 1500 {सैनिटेशन सुविधाएं- 1000 {यूज्ड वाटर मैनेजमेंट- 1000 {मशीनों से सीवरेज की सफाई- 500 {स्वच्छता जनजागरूकता- 1500 {संस्थागत ढांचा- 1000 {सफाई कर्मियों का कल्याण- 500 {सिटीजन फीडबैक- 1000। स्वच्छता के दावों की जमीनी हकीकत बताएंगे लोग आवासीय क्षेत्रों के साथ-साथ व्यावसायिक इलाके, सार्वजनिक स्थल, पार्क, पर्यटन स्थल और परिवहन केंद्र भी जांच के दायरे में होंगे। सर्वे के दौरान टीम हर जगह की फोटो खींचने के साथ वीडियो रिकॉर्डिंग भी करेगी। उसी के आधार पर अंक दिए या काटे जाएंगे। स्वच्छता सर्वे 2025-26 में सरकारी सिस्टम के साथ-साथ आम लोगों की भूमिका भी पहले से कहीं ज्यादा अहम कर दी गई है। अब लोग केवल तय समय में शिकायत नहीं करेंगे, बल्कि फीडबैक दे सकेंगे। नगर निगमों के स्वच्छता के दावों की जमीनी हकीकत नागरिक ही सामने रखेंगे।

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