लुधियाना| ओशो लुधियाना मेडिटेशन सोसाइटी के स्वामी ध्यान सुमित ने वर्तमान जीवनशैली पर चिंतन व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भौतिक सुख-सुविधाओं के साधन तो बढ़ रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि मानसिक शांति और रिश्तों की मिठास लगातार कम होती जा रही है। वर्तमान दौर की सबसे बड़ी चुनौती अपने गृहस्थ जीवन और पारिवारिक ढांचे को बचाए रखने की है। स्वामी सुमित ने जोर देकर कहा कि आज के समय में मेडिटेशन कोई विलासिता नहीं बल्कि एक अनिवार्य जीवन पद्धति बन चुका है। उन्होंने वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि छोटी-छोटी बातों पर होने वाले मतभेद अब गंभीर विवादों का रूप ले रहे हैं। पति-पत्नी के बीच बढ़ता अहंकार और धैर्य की कमी हंसते-खेलते परिवारों को अलगाव की कगार पर खड़ा कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि असली संतुष्टि बाहरी सुख-साधनों में नहीं बल्कि हमारे भीतर है। जब ध्यान हमारी दिनचर्या का हिस्सा बनता है तो कर्तव्यों के प्रति समर्पण का भाव जागृत होता है। एक संतुलित मन ही परिवार की नींव को मजबूत कर सकता है।


