हकीकत… पोलिंग पार्टियों के सोने के लिए कहीं गद्दा नदारद, तो कहीं पीने का साफ पानी तक नहीं

नगर निगम चुनाव को शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन मुस्तैद है। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर दंडाधिकारियों तक सभी चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं। निर्वाचन कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के उद्देश्य से रविवार को ही सभी पोलिंग पार्टियों को संबंधित मतदान केंद्रों के लिए रवाना कर दिया गया। प्रशासन का दावा था कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदानकर्मियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, जैसे बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से भिन्न नजर आई। दैनिक भास्कर द्वारा विभिन्न मतदान केंद्रों के निरीक्षण में कई स्थानों पर अव्यवस्थाएं सामने आईं। कई केंद्रों पर न तो मतदानकर्मियों के बैठने की समुचित व्यवस्था थी और न ही पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध था। कुछ स्थानों पर शौचालय की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। कई बूथों पर मतदानकर्मियों को अपने सामान और चुनाव सामग्री रखने के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध नहीं कराया गया। कई जगह उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। इधर, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस महकमा पूरी तरह सक्रिय है। संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। राजकीयकृत मध्य विद्यालय, मोरहाबादी — बरामदे और स्कूल के बाहर अंधेरा वार्ड संख्या 3 के इस बूथ पर मतदान कराने के लिए रविवार दोपहर मतदानकर्मी पहुंचे। देर शाम पता चला कि कमरे में तो लाइट लगी है, लेकिन बरामदे में पूरी तरह अंधेरा है। बाथरूम में भी प्रकाश की व्यवस्था नहीं थी। देर रात तक बरामदे में लाइट की व्यवस्था नहीं की गई थी। बूथ के बाहर भी प्रकाश के अभाव में अंधेरा पसरा रहा। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, चिरौंदी — पानी की व्यवस्था नहीं, टंकी लगाकर कराया गया इंतजाम वार्ड संख्या 4 के इस मतदान केंद्र पर जब मतदानकर्मी पहुंचे तो पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। संबंधित पदाधिकारी के पास शिकायत पहुंचने के बाद तत्काल टंकी लगाकर पानी की व्यवस्था कराई गई। रात में विश्राम के दौरान पता चला कि कई कमरों में पंखे खराब हैं। जिला स्कूल — 300 की क्षमता वाले हॉल में 1000 से अधिक रिजर्व मतदानकर्मी, देर रात तक हंगामा जिला स्कूल के हॉल में एक हजार से अधिक रिजर्व मतदानकर्मियों को ठहरा दिया गया, जबकि हॉल की क्षमता लगभग 300 लोगों की है। क्षमता से तीन गुना अधिक लोगों के पहुंचने से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हॉल में केवल एक शौचालय था, जिससे मतदानकर्मियों को काफी देर तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। सोने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी। कुव्यवस्था से परेशान मतदानकर्मियों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को बुलाना पड़ा। बाद में सोने के लिए मुख्य भवन को खुलवाया गया, लेकिन वहां भी सभी को समायोजित नहीं किया जा सका। देर रात परेशान मतदानकर्मी हॉल के बाहर निकल आए और खुले मैदान में पेड़ के नीचे सोने को मजबूर हो गए।
भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट

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